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अब बिहार के खेतों में भी उगेंगे मोती, किसान ने यूट्यूब से सीखी खेती; सालाना ₹200000 की कमाई

समुद्र में सीप से निकलने वाले मोतियों की खेती अब अरवल के खेतों में भी होने लगी है। बंशी सूर्यपुर प्रखंड की शेरपुर पंचायत के ब्रह्मलाल बीघा गांव निवासी किसान रमेश कुमार सिंह ने जिले में पहली बार मोती की खेती शुरू की है।

पारंपरिक खेती से अलग इस नए प्रयोग के माध्यम से वह अच्छी आमदनी की उम्मीद कर रहे हैं। रमेश कुमार सिंह ने बताया कि यूट्यूब पर वीडियो देखने के दौरान उन्हें मोती की खेती के बारे में जानकारी मिली।

इसके बाद उन्होंने कई लोगों से संपर्क किया और पश्चिम चंपारण जिले में दो दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया। फिर मत्स्य पालन विभाग से संपर्क कर योजना और अनुदान की जानकारी ली।

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की विविधीकरण योजना के तहत उन्होंने दो लाख 24 हजार 600 रुपये की लागत से मोती की खेती शुरू की है। इसमें एक लाख 34 हजार 760 रुपये अनुदान के रूप में मिले हैं। विभाग की ओर से उन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए भुवनेश्वर भी भेजा जा रहा है।

आधा एकड़ के तालाब में दो हजार सीप

मोती की खेती के लिए किसान ने आधा एकड़ जमीन में तालाब बनवाया है। इसमें जहानाबाद से मंगाए गए दो हजार सीप रखे गए हैं। सीपों को नर्सरी में करीब एक महीने तक रखने के बाद ऑपरेशन किया जाता है। इस दौरान सीप के अंदर दो सांचे डाले जाते हैं, जिन्हें न्यूक्लियस कहा जाता है।

इसके बाद सीपों को जाली में रखकर पानी में 18 से 20 महीने तक छोड़ा जाता है। निर्धारित अवधि के बाद सांचे के अनुसार मोती तैयार होते हैं। एक मोती की औसत कीमत 100 से 200 रुपये तक होती है। अच्छी गुणवत्ता वाले मोती की कीमत एक हजार रुपये तक मिल सकती है।

सालाना दो लाख से अधिक आय की संभावना

जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी आशुतोष आनंद ने बताया कि मत्स्य विविधीकरण योजना के तहत दो किसानों को मोती की खेती का प्रशिक्षण दिया गया था। इनमें एक किसान ने खेती शुरू कर दी है। उनके अनुसार, आधा एकड़ में मोती की खेती से सालाना दो लाख रुपये से अधिक की आय हो सकती है।

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