
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के एक छात्र ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर हाल ही में हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की सीबीआई जांच की मांग की है।
अन्य बातों के अलावा, छात्र ने बताया है कि विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति, डॉ. अशोक कुमार मित्तल, पंजाब से संसद सदस्य (राज्यसभा) हैं। याचिकाकर्ता ने कहा, ”वह आप छोड़ कर इस साल अप्रैल में भाजपा में शामिल हो गए और 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
जनहित में दायर इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ द्वारा सुनवाई किए जाने की उम्मीद है।
भारत सरकार के खिलाफ अपनी याचिका में, रवि राज ने कहा कि 26 सितंबर की रात को, विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच एक असत्यापित पोस्ट प्रसारित हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि एक कर्मचारी ने परिसर में एक छात्रा के साथ बलात्कार किया था और विश्वविद्यालय ने उसे घर भेज दिया था। पोस्ट में कहा गया था कि लड़की ने बाद में आत्महत्या कर ली थी।
उन्होंने कहा, ‘उस पोस्ट और व्हाट्सएप संदेशों के बल पर लगभग 2,000 छात्र जीएच-3 छात्रावास के बाहर जमा हो गए। रात करीब 2 बजे फगवाड़ा और जालंधर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 को जाम कर दिया। रात के दौरान और अगली सुबह तक, छात्रों और बाहरी लोगों ने कई इमारतों में आग लगा दी, दरवाजे, कांच और टर्नस्टाइल गेट तोड़ दिए, इमारतों में घुस गए और सामान और सामग्री लूट ली, और उन कर्मचारियों पर हमला किया जिन्होंने उन्हें शांत करने की कोशिश की। तब से हिंसा रुकी नहीं है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे विश्वसनीय रूप से पता चला है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोग, जिनमें पुरुष और महिलाएं शामिल हैं, ज्यादातर 30 के दशक में हैं, परिसर में पहुंचे। उनमें से कुछ “खुले वाहनों” में थे, वॉकी-टॉकी ले जा रहे थे और तलवारें, छड़ें, बंदूकें और दरांती लहरा रहे थे। उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने चेहरे ढके हुए थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने जबरन विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार खोले और तोड़े, जिससे आपराधिक अतिचार हुआ। वे तोड़फोड़ में भी लिप्त थे, सीसीटीवी कैमरों, कंप्यूटर, यूपीएस सिस्टम, एलईडी स्क्रीन, टर्नस्टाइल गेट, बूम बैरियर और सुरक्षा कार्यालयों को नष्ट कर रहे थे और जला रहे थे। उन्होंने सुरक्षा गार्डों पर भी हमला किया, कई स्थानों पर आग लगा दी और परिसर में दुकानों, लैपटॉप, मोबाइल, बैंक शाखाओं और एटीएम को लूट लिया।
याचिकाकर्ता ने कहा, ‘एलपीयू के छात्रावास में रहने वाले कुछ छात्र और परिसर के बाहर पीजी आवासों में रहने वाले कुछ छात्र भी हिंसा में शामिल थे, लेकिन उनमें से अधिकांश बाहरी थे.’
उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट संकेत हैं कि विरोध प्रदर्शन स्वत: स्फूर्त नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित हमला था जिसे पृष्ठभूमि में कुछ लोगों या संगठनों द्वारा नियंत्रित किया गया था, जिसका दुर्भावनापूर्ण इरादा विश्वविद्यालय को बदनाम करना और राज्य में माहौल बिगाड़ना था।
उन्होंने कहा, ‘एक रात पहले ही इसी तरह के दावों पर कि दो छात्राएं लापता हो गई थीं या आत्महत्या से मर गई थीं, राजपुरा के चितकारा विश्वविद्यालय में हिंसा भड़क गई थी, जहां विश्वविद्यालय और पुलिस ने कहा था कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी. हिंसा की इस तरह की घटनाएं किसी और की तुलना में विश्वविद्यालय के छात्रों को अधिक नुकसान पहुंचाती हैं और इसके अलावा, परिसर में भय का माहौल पैदा करती हैं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पुलिस को देर रात करीब 1.45 बजे सभा की सूचना मिली थी। फिर भी, नाकाबंदी, आगजनी और लूटपाट घंटों तक चली, और इस बर्बरता के खिलाफ कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों ने भी दावे के परस्पर विरोधी विवरण दिए थे।
पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ने मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि बलात्कार और आत्महत्या के सभी आरोप अफवाह हैं। यहां तक कि कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने भी इस कथित घटना को ‘अफवाह’ करार दिया है.
उन्होंने कहा, “फिर भी, उसी दिन बाद में, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें बिना किसी सबूत और सत्यापन के जीएच-3 छात्रावास में एक अनाम और अज्ञात लड़की पीड़िता के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया।



