चुनाव आयोग के खिलाफ ‘आधारहीन आरोप’ राष्ट्रहित में नहीं: रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चुनाव आयोग और देश की चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को लेकर रविवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के दावों का उद्देश्य जनता को गुमराह करना और संवैधानिक संस्थाओं में अविश्वास पैदा करना है। जनसेवा सदन में गुप्ता ने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं के बारे में विवाद पैदा करने के बजाय अपने विकास मॉडल और नीतियों के बारे में लोगों से बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और सरकारें जनहित में कई काम कर रही हैं।

चुनाव आयोग के खिलाफ आरोपों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग ने विपक्ष के कार्यकाल के दौरान उसी स्तर की पारदर्शिता के साथ काम किया था। उन्होंने कहा कि आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं और फैसलों को जनता के सामने रखा है और स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन ऐसे सवाल तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोप लगाना और एक संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

फॉर्म-6 को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बारे में पूछे जाने पर गुप्ता ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित एक घोषणा अलग से जोड़ी गई है और फॉर्म-6 और संबंधित घोषणा चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन एक नियमित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना और उन प्रविष्टियों का सत्यापन करना है जो मृत्यु, स्थानांतरण, दोहराव या अन्य कारणों से अयोग्य हो गई थीं।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर गुप्ता ने कहा कि इस प्रक्रिया में उन लोगों की पहचान करना शामिल है जिनकी मृत्यु हो गई थी, डुप्लीकेट प्रविष्टियां, मतदाता स्थानांतरित हो गए थे और अन्य प्रविष्टियां जो अवैध हो गई थीं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में दावों और आपत्तियों के साथ-साथ मतदाता सूची के सत्यापन के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है।

इस तरह के सत्यापन पर विपक्ष की चिंताओं पर सवाल उठाते हुए, गुप्ता ने कहा, “आप लोगों को गुमराह करने के लिए जितना चाहें उतना झूठा प्रचार कर सकते हैं, लेकिन लोग सब कुछ देख रहे हैं। जनता एक-एक बात का जवाब देगी। झूठ के कोई पैर नहीं होते।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष को चुनाव प्रणाली और संवैधानिक संस्थाओं पर सिर्फ इसलिए सवाल नहीं उठाना चाहिए कि चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं निकले। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी इसी तरह के सवाल उठाए गए थे।

गुप्ता ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी आपत्ति को निर्धारित संवैधानिक और कानूनी चैनलों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि उनकी गतिविधियां और बयान उनकी नजर में ‘देशद्रोह से कम नहीं’ हैं और उनके खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोध की अपनी जगह है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना और पर्याप्त आधार के बिना चुनावी प्रक्रिया को स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पात्र मतदाताओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने और मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए काम कर रहा है।

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