
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव फैलाने के एक मामले में शुक्रवार को दोपहर तीन बजे यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के सेक्टर 30 स्थित कार्यालय में पेश हुए।
राजबीर के साथ सीबीआई कार्यालय पहुंचे वकील जीपीएस घुम्मन ने उनकी पेशी की पुष्टि करते हुए कहा कि वह जांच में शामिल होकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इस रिपोर्ट को दाखिल करने के समय राजबीर एजेंसी के कार्यालय के अंदर थे।
सीबीआई ने राजबीर को तीन नोटिस जारी कर जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा था। संगरूर जिले के घाराचोन में उनके पैतृक गांव में उनके घर के गेट पर भी नोटिस चस्पा किए गए थे।
जीपीएस घुम्मन ने कहा कि राजबीर और अन्य आरोपियों को नोटिस अब व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जा रहे हैं, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमने फैसला किया कि सभी को जांच में शामिल होना चाहिए। मानसा के आप नेता चस्पिंदर चहल सहित पांच से अधिक लोग जांच में शामिल हुए और जांच अधिकारियों के सभी सवालों के जवाब दिए।
सीबीआई ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 5 अक्टूबर के आदेश के बाद मामला दर्ज किया था, जिसमें सरकारी अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और प्रभाव फैलाने के आरोपों की जांच का निर्देश दिया गया था। जिन छह आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें राजबीर सिंह घुम्मन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और राजदीप सिंह नागरा शामिल हैं। एफआईआर में अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों का भी जिक्र है।
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61 (2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7 ए, 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
प्राथमिकी के अनुसार, आरोप आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की सरकारी पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीति निर्माण, प्रशासनिक अनुमोदन, निविदा शर्तों, लाइसेंसिंग, भूमि उपयोग में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व संबंधी मामलों सहित सरकारी पोस्टिंग के लिए धन के कथित आदान-प्रदान से संबंधित हैं। कथित गतिविधियों को 2023-2026 की अवधि से संबंधित बताया गया है।
251 पन्नों की प्राथमिकी प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई थी और ईडी द्वारा पंजाब पुलिस प्रमुख के साथ साझा की गई सामग्री का संदर्भ है। 12 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए उस स्तर पर आरोपियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। इसने राज्य को जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया।


