राज्यपंजाब

पंजाब पुलिस के बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह के आत्मसमर्पण पर पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने उठाया सवाल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने पंजाब पुलिस के बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह के आत्मसमर्पण पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इस पर सावधानीपूर्वक बातचीत की गई थी।

कथित मादक पदार्थों की तस्करी और जबरन वसूली रैकेट से जुड़े मामलों का सामना कर रहे राजजीत सिंह ने पटियाला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वह 2023 से फरार चल रहा था।

राजजीत सिंह के खिलाफ जांच शुरू करने वाले अधिकारियों में शामिल निरंजन सिंह ने सवाल किया कि अगर पूर्व पुलिस अधिकारी इलाके में ही रहे तो उन्हें पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, ‘आत्मसमर्पण से पता चलता है कि वह हमेशा मौजूद थे। फिर उन्हें पहले गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? कौन उसकी रक्षा कर रहा था और किसने उसे आश्रय दिया? एक बार इन नामों को सार्वजनिक कर दिए जाने के बाद मादक पदार्थों की तस्करी और पुलिस के कुछ वर्गों से जुड़े पूरे नापाक गठजोड़ का पर्दाफाश लोगों के सामने आ जाएगा।

निरंजन ने आरोप लगाया कि राजजीत सिंह के हितों की रक्षा के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाए बिना आत्मसमर्पण नहीं किया जा सकता था। उन्होंने उन लोगों के नाम भी मांगे जिन्होंने कथित तौर पर गिरफ्तारी से बचने में उनकी मदद की।

ईडी के पूर्व अधिकारी ने कहा कि उन्होंने मादक पदार्थों के कारोबार के साथ राजजीत सिंह के कथित संबंधों की जांच शुरू की थी, लेकिन बाद में केंद्र ने फाइल को वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी सेवा के दौरान और बाद में वित्त मंत्री को भी पत्र लिखा था, जिसमें कथित ड्रग नेटवर्क का जिक्र किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

निरंजन ने आगे आरोप लगाया कि प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों ने राजजीत सिंह को बचाया था और आत्मसमर्पण का उद्देश्य पंजाब पुलिस के पूर्व और सेवारत अधिकारियों से जुड़े खुलासे को रोकना था।

पंजाब के ड्रग नेटवर्क की जांच से जुड़े निरंजन ने खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को भी समर्थन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों और संगठित आपराधिक नेटवर्क की सांठगांठ के कारण पंजाब में नशे की समस्या बनी हुई है। उन्होंने केंद्र और पंजाब सरकार पर इस मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया।

ड्रग माफिया के ‘संबंध’ को लेकर राजजीत को बर्खास्त कर दिया गया था।

Related Articles

Back to top button