
शहर के मालीघाट नाका रोड स्थित दीपक इंडस्ट्रीज की मोमबत्ती फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने अग्निशमन विभाग की तैयारियों और औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। आग की लपटें उठते ही पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई।
मोमबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील पैराफिन मोम के कारण आग तेजी से फैली और देखते ही देखते फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया। इसके कारण आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया है।इस घटना में आग बुझाने के दौरान फैक्ट्री संचालक दीपक कुमार भी बुरी तरह से झुलसने के घायल हो गए हैं।
फैक्ट्री में घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल
स्थानीय स्तर पर बताया गया कि फैक्ट्री में व्यावसायिक सिलेंडर के बजाय घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा था। छोटे-छोटे बच्चों से भी मजदूरी का काम करने की बात सामने आ रही है। कई स्तर पर चुप होने की चर्चा है।

मोमबत्ती बनाने के दौरान गैस सिलेंडर में आग लगने और विस्फोट होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।
आधा किलोमीटर दूर अग्निशमन कार्यालय, फिर भी देरी क्यों?
इस घटना ने अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर अग्निशमन विभाग का कार्यालय है, इसके बावजूद दमकल की गाड़ी पहुंचने में आधे घंटे से अधिक का समय लग गया।

यदि दमकल समय पर पहुंचती तो आग के फैलाव को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की संभावना थी। देरी के कारण आग की लपटें और तेज हो गई।
एनओसी के बारे में विभाग को पता नहीं, सुरक्षा इंतजामों की जांच कौन करेगा?
फैक्ट्री में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम होने या नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
फैक्ट्री के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी थी या नहीं, इस संबंध में भी मौके पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी है कि वह जांच कर बताए कि इकाई किन सुरक्षा मानकों के आधार पर संचालित हो रही थी।
आसपास गैस गोदाम, एक चूक बन सकती है बड़े हादसे की वजह
मालीघाट नाका रोड के आसपास कई गैस गोदाम होने की बात भी सामने आई है। ऐसे संवेदनशील इलाके में ज्वलनशील सामग्री से जुड़ी फैक्ट्रियों और गैस भंडारण केंद्रों की सुरक्षा की अनदेखी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। आग यदि आसपास की इकाइयों तक पहुंचती तो नुकसान कहीं अधिक भयावह हो सकता था।
घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अग्निशमन विभाग केवल हादसे के बाद आग बुझाने तक सीमित है या औद्योगिक इकाइयों की नियमित सुरक्षा जांच भी करता है। अब जरूरी है कि फैक्ट्री की अग्निशमन एनओसी, गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल और सुरक्षा उपकरणों की जांच कराई जाए। साथ ही, आसपास के गैस गोदामों और अन्य फैक्ट्रियों का भी सुरक्षा ऑडिट हो, ताकि अगली बार किसी बड़ी त्रासदी के बाद जिम्मेदारी तय करने की नौबत न आए।



