‘लड़कियां देवी और काली बनें, न कि बुर्का वाली’; दमोह में पं. धीरेंद्र शास्त्री ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ दिया संदेश

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया जा रहा है। मंगलवार को उनकी यह यात्रा दमोह पहुंची, जहां पर सामाजिक समरसता, जातिगत भेदभाव मिटाने, राष्ट्रवाद और नशामुक्ति का संदेश देने के बीच उन्होंने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ भी हिंदू समाज की लड़कियों व युवतियों को जागरूक किया। उन्होंने बच्चियों को संबोधित करते हुए कहा कि लड़कियां देवी और काली बनें, न कि बुर्का वाली।
यात्रा में सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की बात
सनातन हिंदू एकता यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लड़कियों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उनका यह बयान धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। यात्रा के जरिए वे लोगों को सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करने के साथ सामाजिक एकता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का संदेश दे रहे हैं।
जातिवाद छोड़ एकजुट होने का आह्वान
धीरेंद्र शास्त्री ने समाज से जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे पर जोर देते हुए कहा कि समाज की मजबूती एकता, सद्भाव और सहयोग में है। समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से दूर रहकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता है।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। रास्ते में बड़ी संख्या में लोग जुटकर महाराज के दर्शन कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पमालाओं तथा पुष्पवर्षा के साथ यात्रा का स्वागत किया जा रहा है।
नशामुक्ति का भी दिया संदेश
सनातन हिंदू एकता यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने नशे की लत को सामाजिक समस्या बताते हुए लोगों से इससे दूर रहने की अपील की। उन्होंने गांवों को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उनके संदेश के मुताबिक, नशे की आदत परिवारों को प्रभावित करती है और युवाओं के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर डालती है।
यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता, आपसी सम्मान और राष्ट्रवाद जैसे विषयों पर भी जोर दिया जा रहा है। आयोजकों और यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उद्देश्य इन संदेशों को जन-जन तक पहुंचाना है। मार्ग में जगह-जगह हो रहे स्वागत और जुट रही भीड़ के बीच यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मुद्दों को लेकर भी चर्चा में बनी हुई है।



