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AICWA भड़का, Fawad Khan और Mahira Khan ने भारत के खिलाफ उगला जहर; पाकिस्तानी बैन, साथ देने वाले गद्दार

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी कलाकार भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। ऐसे में AICWA ने उन पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। असोसिएशन ने दावा किया कि उनका समर्थन करने वाले भारतीय कलाकार भी गद्दार हैं।

AICWA: पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान और माहिरा खान ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए बयान पर द ऑल इंडियन सिने वर्कर्स असोसिएशन को भड़का दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी कलाकार भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। भारतीय भी गद्दार हैं जो उनका समर्थन करते हैं। असोसिएशन ने पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने का निर्णय लिया है।

पाक एक्टर्स के घटिया बयान

AICWA ने मीडिया को बताया कि वह पाकिस्तानी एक्ट्रेस माहिरा खान और एक्टर फवाद खान के भारत विरोधी बयान की कड़ी निंदा करता है। इन लोगों ने खुलेआम भारत की आलोचना की और देश ने अपनी संप्रभुता को बचाने के लिए क्या किया? माहिरा खान ने भारत की सेना की प्रतिक्रिया को ‘कायराना’ बताया, जबकि फवाद खान ने आतंकवाद की निंदा करने के बजाय उसके कदम की आलोचना की और विभाजनकारी विचारधारा का समर्थन किया।’

राष्ट्र के लिए अपमानजनक

ये बयान न सिर्फ हमारे राष्ट्र के लिए अपमानजनक हैं बल्कि उन असंख्य बेगुनाहों की जिंदगियों की भी तौहीन है जिन्होंने आतंक के हाथों अपनी जान गंवाई और उन बहादुर सैनिकों की भी जिन्होंने देश के लिए जान कुर्बान की। AICW एक बार फिर से भारत में काम करने वाले पाकिस्तानी फिल्ममेकर्स, फाइनेंसर्स और कलाकारों को बैन करने का निर्णय लेता है। पाकिस्तानी कलाकारों के साथ कोई भारतीय कलाकार को कोलैबोरेट नहीं करेगा, न ही हम उनके साथ कोई वैश्विक प्लैटफॉर्म साझा करेंगे।

अबीर गुलाल एक शर्मनाक

भारतीय कलाकारों से आह्वान है कि वे पाकिस्तानी कलाकारों को सपोर्ट करना बंद करें। वे अपने देश के साथ दृढ़ता से खड़े होते हैं और सरेआम ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हैं। भारत की फिल्म इंडस्ट्री को यह समझना चाहिए कि कला का हवाला देकर इन कलाकारों का समर्थन करना देश की प्रतिष्ठा का अपमान है। इंडस्ट्री के कुछ लोग हमारे राष्ट्र की भावनाओं को किनारे करके पाकिस्तानी कलाकारों से सहानुभूति दिखा रहे हैं। अबीर गुलाल फिल्म को AICWA ने शर्मनाक उदाहरण बताया। इसके मुख्य अभिनेता फवाद खान हैं। स्टेटमेंट में कहा गया है कि पुलवामा हमले के बाद भी फवाद को फिल्म में शामिल किया गया था। लेटर में लिखा है कि भारत के कलाकारों और फिल्ममेकर्स को तय कर लेना चाहिए कि वे अपने देश के साथ हैं या फिर खुलेआम इसका विरोध करने वालों के साथ।

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