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1 पेड़ काटें, 10 पौधे लगाएं: पंजाब कैबिनेट ने वृक्ष संरक्षण विधेयक को मंजूरी, उल्लंघन पर लगेगा 50,000 रुपये का जुर्माना

पंजाब में एक पेड़ काट लें और आपको उसके स्थान पर 10 पेड़ लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक का प्रावधान है, जिसे बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

यह विधेयक शहरी और अन्य गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई, हटाने और प्रत्यारोपण को विनियमित करने के लिए एक कानूनी ढांचे का मार्ग प्रशस्त करता है। इस विधेयक को पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने की उम्मीद है।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विधेयक में अवैध रूप से पेड़ काटने वालों पर जुर्माना और पर्यावरण मुआवजे का भी प्रावधान है। अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के पहले अपराध पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा, जो दूसरी बार उल्लंघन के लिए 35,000 रुपये और तीसरे अपराध के लिए 50,000 रुपये हो जाएगा।

यह उल्लेख किया जा सकता है कि भारत वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब अपने भौगोलिक क्षेत्र का 3.67 प्रतिशत के साथ राज्य में सबसे कम वन क्षेत्रों में से एक है – जो इसे देश के सबसे कम वन वाले राज्यों में से एक बनाता है। यहां तक कि जब वनों के बाहर वृक्षों को शामिल किया जाता है, तो राज्य का संयुक्त वन और वृक्ष आवरण 12.58 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय वन नीति के तहत परिकल्पित 33 प्रतिशत बेंचमार्क से बहुत कम है।

विधेयक का मसौदा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद तैयार किया गया है, जिसने पंजाब सरकार को शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को विनियमित करने के लिए एक समर्पित कानून बनाने के लिए कहा था, जहां वर्तमान में ऐसा कोई व्यापक कानून मौजूद नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि कृषि वानिकी और खेत में उगाए जाने वाले वाणिज्यिक वृक्ष प्रजातियां कानून के दायरे से बाहर रहेंगी ताकि किसानों को वृक्षारोपण करने से हतोत्साहित न किया जा सके।

चीमा ने कहा कि मंत्रिमंडल ने पंजाब राज्य आउटसोर्स कार्मिक (अनुबंध में संक्रमण) विधेयक को भी मंजूरी दे दी है, जिसे अब इसके अधिनियमन के लिए पंजाब विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। शुरुआत में सरकार ने 65,000 कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अध्यादेश का रास्ता अपनाया था। लेकिन अध्यादेश को पंजाब के राज्यपाल द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, ‘यह एक धन विधेयक है और इसे सदन में पेश करने से पहले राज्यपाल की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती है। हमें यकीन है कि यह जल्द ही किया जाएगा।

इस बीच, कैबिनेट ने तीन स्व-वित्तपोषित निजी डिजिटल विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंजूरी दी- एक होशियारपुर में और दो पटियाला में। इसके अलावा, इसने निजी गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस के पंजाब विनियमन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी।

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