Maha Shivratri Ke Upay: महाशिवरात्रि पर 9 ग्रहों को शांति देने के लिए ये उपाय करें; व्रत पारण करने का तरीका भी जानें
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Maha Shivratri Ke Upay: आज बुधवार के दिन महाशिवरात्रि का व्रत रख शिव पूजन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज कुछ उपाय करने से ग्रहों की स्थिति मजबूत हो सकती है और उनका बुरा प्रभाव कम हो सकता है।
Maha Shivratri Ke Upay: महाशिवरात्रि भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का दिन है। इस दिन कई शिवभक्त महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत, रुद्राभिषेक और उपाय करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज कुछ उपाय करने से ग्रहों की स्थिति मजबूत हो सकती है और उनका बुरा प्रभाव कम हो सकता है।
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करने से कार्य शीघ्र सिद्ध होता है। धन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को स्फटिक शिवलिंग पर गोदुग्ध से, सुख-समृद्धि की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को गोदुग्ध में चीनी व मेवे के घोल से, शत्रु विनाश के लिए सरसों के तेल से, पुत्र प्राप्ति के लिए मक्खन या घी से, अभिष्ट की प्राप्ति को गोघृत से तथा भूमि भवन एवं वाहन की प्राप्ति को शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए।
महाशिवरात्रि पर नौ ग्रहों की शांति के लिए इन उपायों का पालन करें
सूर्य से संबंधित कोई रोग या कष्ट जन्म कुण्डली में हो तो श्वेतार्क के पत्तों को पीसकर गंगाजल में मिलाकर रुद्राभिषेक करें।
चन्द्रमा से संबंधित बीमारी या कष्ट होने पर काले तिल को गंगाजल में मिलाकर अभिषेक करें।
यदि मंगल से संबंधित कोई बीमारी या कष्ट हो तो अमृता रस को गंगाजल में मिलाकर अभिषेक करें।
यदि कोई रोग या कष्ट बुध से उत्पन्न हो तो विधारा के रस से अभिषेक करें।
गुरु जन्य कष्ट या बीमारी होने पर हल्दी-गोदुग्ध से अभिषेक करें।
शुक्र से जुड़े रोग और पीड़ा होने पर गोदुग्ध के छाछ से अभिषेक करें।
रोग या कष्ट होने पर शमी के पत्ते पीसकर गंगा जल में मिलाकर अभिषेक करें।
जब राहु परेशान करता है तो गंगा जल और दूर्वा मिलाकर अभिषेक करें।
अगर कोई बीमारी या कष्ट उत्पन्न होता है, तो कुश की जड़ को पीसकर गंगाजल में मिलाकर रुद्राभिषेक करने से बीमारी दूर होती है व समस्त ग्रह जनित रोग का समन होता है।
जानें व्रत पारण करने का तरीका: शिव मन्दिर में व्रती को चाहिए कि वह पंचामृत से अभिषेक कर दूसरे दिन सूर्योदय के बाद काले तिल, त्रिमधु युक्त पायस व नवग्रह समिधा से हवन कर एक सन्यासी को भोजन कराकर स्वयं पारण करें। शिवलिङ्ग पर चढाई गयी कोई भी वस्तु जनसामान्य के लिए ग्राह्य नहीं है, अपितु अलग से मिष्ठान फल आदि का भोग लगा कर उसे इष्ट मित्रों में वितरण कर स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए।