2017 से अब तक 447 यात्रियों को अनियंत्रित व्यवहार के लिए नो-फ्लाई लिस्ट में रखा गया

नागर विमानन मंत्रालय (एमओसीए) के आंकड़ों के अनुसार, विमान में अनियंत्रित व्यवहार के लिए 2017 से कुल 447 यात्रियों को नो-फ्लाई लिस्ट में रखा गया है।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा 2017 में अनियंत्रित यात्रियों से निपटने के लिए नियम पेश किए जाने के बाद से इस आंकड़े में नो-फ्लाई लिस्ट में शामिल यात्रियों को शामिल किया गया है।
मौजूदा ढांचे के तहत, अनियंत्रित यात्रियों को मोटे तौर पर उनके कदाचार की गंभीरता के आधार पर तीन स्तरों में वर्गीकृत किया गया है।
निर्धारित विनियमों के तहत गठित एक आंतरिक समिति की सिफारिशों के बाद, एयरलाइनें कदाचार की गंभीरता के आधार पर अवधि के साथ उड़ान प्रतिबंध लगा सकती हैं।
एयरलाइनों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा नो-फ्लाई सूची का रख-रखाव किया जाता है।
यह आंकड़ा ऐसे समय में आया है जब यात्रियों की आक्रामकता, चालक दल के सदस्यों के साथ बहस और विमान में बाधा डालने वाली घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंता का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, डीजीसीए के 2025 के केबिन सुरक्षा परिपत्र 01 के तहत, एयरलाइनों को ईमेल द्वारा 12 घंटे के भीतर यात्रियों के दुर्व्यवहार, यात्रियों के गुस्से या अनियंत्रित व्यवहार से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्ट करने की आवश्यकता होती है।
अधिकारियों ने कहा, ‘विमान के उतरने के 24 घंटे के भीतर डीजीसीए को विस्तृत लिखित सूचना सौंपनी होगी।
नागर विमानन महानिदेशालय ने अनियंत्रित और विघटनकारी यात्रियों से निपटने और विमान पर सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागर विमानन अपेक्षाएं (सीएआर) के तहत एक विनियामक ढांचा भी निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा, ‘किसी यात्री को ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने से पहले एयरलाइंस को एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है और यात्री को जवाबदेह ठहराना होता है। यह कार्रवाई सीएआर के अनुसार गठित एक आंतरिक समिति की सिफारिशों पर आधारित है।
हालांकि, मंत्रालय के आंकड़ों में नो-फ्लाई लिस्ट में शामिल 447 यात्रियों का सालवार या एयरलाइन-वार विवरण नहीं दिया गया है। इसमें यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इनमें से कितने यात्रियों को उड़ान प्रतिबंध से परे सजा का सामना करना पड़ा।



