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पश्चिमी यूपी की थानाभवन सीट पर क्या फिर फंस जाएगी बीजेपी? समझिए पूरा समीकरण

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में स्थित शामली जिले की थाना भवन विधानसभा सीट राज्य की सबसे चर्चित और सियासी रूप से संवेदनशील सीटों में से एक है. कहने को तो यह सीट वीआईपी श्रेणी में दर्ज नहीं है. लेकिन पूर्व गन्ना विकास मंत्री सुरेश कुमार राणा का राजनीतिक गढ़ होने और लगातार बदलते चुनावी समीकरणों के चलते 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां की राजनीति गरमा गई है.

2012 और 2017 में बीजेपी के परचम से लेकर 2022 में सपा-आरएलडी गठबंधन की जीत और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा की मामूली बढ़त तक थाना भवन सीट ने कई सियासी रंग देखे हैं. अब जब आरएलडी और बीजेपी एक साथ (NDA) हैं तो 2027 का मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है.

जब 265 वोटों से पलटी थी बाजी

थानाभवन सीट का इतिहास रहा है कि यहां किसी एक दल का स्थायी दबदबा नहीं रहा. कांग्रेस, जनता पार्टी, लोकदल, सपा, आरएलडी और बीजेपी सभी को यहां की जनता ने मौका दिया है.

2022 में मंत्री रहे सुरेश राणा को हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में थाना भवन विधानसभा क्षेत्र के भीतर सपा को मात्र 627 वोटों की बढ़त मिली. इससे साफ है कि 2027 में मुकाबला बेहद नजदीकी होने वाला है.

थानाभवन का जातीय समीकरण

थाना भवन सीट पर जीत-हार की कुंजी सामाजिक और जातीय लामबंदी के हाथ में होती है.

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