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हरियाणा के बिजली कर्मचारियों ने बिजली वितरण के निजीकरण का किया विरोध, हड़तालों की चेतावनी

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने राज्य के बिजली वितरण नेटवर्क के निजीकरण के प्रस्ताव पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि इस कदम से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और सरकारी स्वामित्व वाले बिजली निगम कमजोर होंगे।

हरियाणा बिजली कर्मचारी और अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस कदम के खिलाफ एकजुट लड़ाई की घोषणा करते हुए कहा कि भिवानी का हर कर्मचारी आंदोलन में भाग लेगा।

हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में गुरुग्राम नगर निगम, मानेसर नगर निगम, सोहना, पटौदी मंडी, फर्रुखनगर, नूंह, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और टौरू में बिजली वितरण के लिए विद्युत अधिनियम की धारा 15 (5) (ए) के तहत एक निजी फर्म इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को वितरण लाइसेंस जारी करने का प्रस्ताव दिया है।

मोर्चा नेताओं ने कहा कि जनता के पैसे और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से दशकों से बने बिजली के बुनियादी ढांचे को औने-पौने दामों पर निजी कंपनियों को सौंपने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस अवसर पर अखिल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के सर्किल सचिव अशोक गोयत सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि; हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता इंजीनियर नारायण प्रकाश; एचईबी वर्कर्स यूनियन के सर्किल सेक्रेटरी मनोज बामला; कपूर सिंह, एससी, एसटी और बीसी वेलफेयर एसोसिएशन के सर्किल सेक्रेटरी; बिजेंद्र सिंह बरार, हरियाणा पावर कॉरपोरेशन एससी, एसटी और बीसी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष; एएचपीसीसी वर्कर्स यूनियन के राज्य समिति के नेता राजेश सरपंच; वरिष्ठ नेता प्रदीप रंगा ने कहा कि यह कदम एक सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में स्थानांतरित करने के समान है, भले ही यह करदाताओं के पैसे से बनाई गई हो।

मोर्चा ने कहा कि भिवानी में कर्मचारी और इंजीनियर उसकी राज्य समिति द्वारा जारी हर निर्देश का पालन करेंगे और निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। पीठ ने चेतावनी दी कि अगर राज्य समिति पूर्ण हड़ताल या कार्य बहिष्कार का आह्वान करती है, तो बिजली विभाग के कर्मचारी आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार होंगे। नेताओं ने कहा कि निजीकरण न केवल कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को प्रभावित करेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं, किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

इस प्रस्ताव के खिलाफ सरकार और नियामक आयोग को चेतावनी देते हुए कर्मचारी संगठनों ने कहा कि अगर अधिकारी फैसले पर पुनर्विचार करने में विफल रहते हैं तो आंदोलन बिजली विभाग से बाहर भी फैल सकता है और जन आंदोलन में बदल सकता है।

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