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शहरों को राज्यों की राजधानियों से शासित नहीं किया जा सकता, स्थानीय सरकारों को सशक्त बनाने की जरूरत है: नीति आयोग के राजीव गौबा

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने शहरी सरकारों के लिए अधिक शक्तियां और वित्तीय स्वतंत्रता का आह्वान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती शहरी आबादी के लिए आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए शासन, योजना और वित्तपोषण में बड़े सुधारों की आवश्यकता होगी।

दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए, गौबा ने कहा, “हम राज्यों की राजधानियों से शहरों को नहीं चला सकते।

नीति आयोग की एक विज्ञप्ति के अनुसार, गौबा ने शहरी शासन को मजबूत करने के लिए पांच साल के कार्यकाल के साथ सीधे निर्वाचित महापौर, मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली और समय पर नगरपालिका चुनावों का आह्वान किया।

उन्होंने राज्यों से 74वें संविधान संशोधन के तहत सभी 18 कार्यों को शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करने का भी आग्रह किया, जिसमें शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, अग्निशमन सेवाएं और यातायात प्रबंधन शामिल हैं।

सुधारों पर जोर इसलिए दिया गया है क्योंकि भारत की शहरी आबादी 2050 तक लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ होने का अनुमान है, जिसमें देश की लगभग आधी आबादी शहरों में रहने की उम्मीद है।

गौबा ने कहा कि इस बढ़ती आबादी के बुनियादी ढांचे, आवास और बुनियादी सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शहरों के प्रबंधन के तरीके में मूलभूत बदलाव की आवश्यकता होगी।

नीति आयोग और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट, मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस का उल्लेख करते हुए, उन्होंने सेवा वितरण और नागरिक भागीदारी में सुधार के लिए शहर की सरकारों को सशक्त बनाने के महत्व पर जोर दिया।

शहरी वित्तपोषण पर, गौबा ने कम नगरपालिका राजस्व पर प्रकाश डाला और बेहतर संपत्ति कर संग्रह, बेहतर उपयोगकर्ता-शुल्क वसूली और राज्यों से शहरी स्थानीय निकायों को धन के अधिक हस्तांतरण का आह्वान किया।

उन्होंने आवास आपूर्ति बढ़ाने और लागत कम करने के लिए भवन निर्माण नियमों और भूमि-उपयोग नीतियों में सुधार का भी आह्वान किया।

इनमें प्रतिबंधात्मक फर्श क्षेत्र अनुपात (एफएआर) को आसान बनाना, मिश्रित-उपयोग विकास को बढ़ावा देना और पारगमन केंद्रों के आसपास निर्माण को प्रोत्साहित करना शामिल है।

गौबा ने राज्यों से प्रवासी श्रमिकों, औद्योगिक मजदूरों, छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए किफायती किराये के आवास का विस्तार करने के लिए मॉडल किरायेदारी अधिनियम को अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों को नए नगरपालिका कानून पेश करने चाहिए और केंद्र को शहरी विकास मिशनों के तहत समर्थन को इन सुधारों के कार्यान्वयन से जोड़ना चाहिए।

प्रस्तावित परिवर्तनों का उद्देश्य शहरों को आर्थिक विकास केंद्र के रूप में मजबूत करना और भारत के विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण का समर्थन करना है।

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