
हरमीत सिंह संधू पूर्व में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं और दिसंबर 2024 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने 2002 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव जीता था, इसके बाद 2007 और 2012 में अकाली दल के टिकट पर तरनतारन से विधायक चुने गए।
AAP के लिए रणनीतिक बढ़त
AAP ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर संधू के पार्टी में शामिल होने की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “हम पूर्व अकाली विधायक हरमीत सिंह संधू जी का AAP परिवार में स्वागत करते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व और मनीष सिसोदिया की उपस्थिति में उन्होंने AAP का दामन थामा।”
पार्टी सूत्रों के अनुसार, संधू के नाम को आगामी उपचुनाव के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने एक निजी सर्वे एजेंसी से उपचुनाव को लेकर रिपोर्ट मंगवाई थी, जिसमें हरमीत सिंह संधू को लोकप्रिय और जीत के योग्य चेहरा बताया गया है।
क्यों छोड़ा अकाली दल का साथ?
हरमीत सिंह संधू का अकाली दल के साथ लंबा राजनीतिक रिश्ता रहा है। वे SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के करीबी माने जाते थे। लेकिन पार्टी से असहमति और मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए उन्होंने नई राह अपनाई। संधू का कहना है कि वह अब आम आदमी पार्टी की पारदर्शी राजनीति और विकास पर केंद्रित एजेंडे से प्रभावित होकर इसमें शामिल हुए हैं।
AAP की उपचुनाव रणनीति
आम आदमी पार्टी पंजाब में अपनी जड़ें और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल के महीनों में पार्टी ने कई नए चेहरों को अपने साथ जोड़कर जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत की है। हरमीत सिंह संधू जैसे अनुभवी नेता का जुड़ना AAP के लिए तरनतारन विधानसभा सीट पर बड़ी मजबूती माना जा रहा है।
पार्टी को उम्मीद है कि संधू के स्थानीय जनाधार और राजनीतिक अनुभव से उन्हें आगामी उपचुनाव में जीत दिलाने में मदद मिलेगी।



