राज्यपंजाब

आतंकवाद के पीड़ितों को सम्मानित करने के लिए हरिके पट्टन में शहीदी स्थल बनाएगा अकाल तख्त

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने मंगलवार को घोषणा की कि पंजाब में अशांत काल के दौरान जान गंवाने वालों की याद में हरिके पट्टन में शहीदी स्थल स्मारक स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने उन लोगों की याद में हरिके पट्टन में एक सामूहिक ‘अरदास’ कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया था और जिनके शवों का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार किया गया था या पंजाब में उग्रवाद के वर्षों के दौरान नदियों में फेंक दिया गया था।

जत्थेदार गर्गज ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) से 1982 और 1995 के बीच हुई सभी बड़ी घटनाओं और हत्याओं का व्यापक दस्तावेजीकरण करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक अभिलेखों को संरक्षित करना आवश्यक है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और कार्यों पर आधारित फिल्म सतलुज की रिलीज और बाद में इसे हटाने के बाद पंजाब के आतंकवाद के दौर पर नए सिरे से सार्वजनिक चर्चा के बीच यह कार्यक्रम हो रहा है। खालरा की जांच में सैकड़ों कथित अवैध दाह संस्कार और जबरन गायब होने का दस्तावेजीकरण किया गया था।

गौरतलब है कि अरदास के दौरान अकाल तख्त ने न केवल सिखों को बल्कि उन हिंदुओं को भी याद किया जो इस अवधि के दौरान गायब हो गए थे और मारे गए थे। इस समारोह को सभी पंजाबियों के लिए सामूहिक प्रार्थना बताते हुए ज्ञानी गर्गज ने कहा कि यह सभा धर्म के बावजूद हर निर्दोष पीड़ित को याद करने के लिए थी।

उन्होंने पंजाब के लिए शांति, सद्भाव और शक्ति के लिए भी प्रार्थना की, ताकि वह अपनी वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से उबर सके, साथ ही समाज से राज्य के हिंसक अतीत से सबक लेने का आग्रह किया।

समारोह में बड़ी संख्या में युवा और धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।

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