आखिर AAP से क्यों दूर हुए राघव चड्ढा? दिल ना मिलने से लेकर दल बदलने तक की Inside Story

कभी केजरीवाल के ‘ब्लू आई बाय’ रहे राघव चड्ढा ने बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है.
उनके समेत 3 सांसदों ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की.
राघव का दावा है कि आम आदमी पार्टी के कुल राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई सांसद बीजेपी का दामन थामेंगे.
उनके इस ऐलान के बाद आम आदमी पार्टी उन्हें गद्दार कह रही है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भगवंत मान ने अरविंद केजरीवाल के सामने कई बार इसकी नाराजगी भी जताई लेकिन लगातार राघव, केजरीवाल के फेवरेट बने रहे. केजरीवाल और पार्टी आलाकमान के साथ उनका टकराव तब शुरू हुआ जब आम आदमी पार्टी के सीनियर नेताओं और खासतौर पर केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान भगवंत मान तो अपने कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों के साथ दिल्ली तक धरना लगाने के लिए पहुंच गए लेकिन राघव चड्ढा इन विरोध कार्यक्रमों से दूर रहे.
तब पार्टी को उनसे ज्यादा मजबूती से साथ पार्टी के लिए खड़ा होने की उम्मीद थी. इस मौके पर भगवंत मान पार्टी के लिए लगातार अपनी वफादारी दिखाने के लिए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होते रहे. अरविंद केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद राघव चड्ढा को इसी वजह से पंजाब से बिल्कुल दूर कर दिया गया. मगर, राघव धीरे-धीरे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से भी दूरी बनाते चले गए.
जिन मुद्दों को लेकर पार्टी ने कई मौकों पर विपक्ष की अन्य पार्टियों के साथ खड़ा होने के लिए फैसला लिया, उन मौकों पर राघव चड्ढा दूर रहे. पार्टी ने जिन मुद्दों को राज्यसभा में उठाने के लिए कहा, उन मुद्दों की बजाय राघव चड्ढा ने अन्य मुद्दों को उठाया. इसी वजह से उनकी पार्टी आलाकमान और खासतौर पर अरविंद केजरीवाल से दूरियां बढ़ती रहीं.
अब राघव ने बड़ा बम फोड़ दिया
राघव संसद में मिडिल क्लास, टैक्स, गिग वर्कर्स जैसे मुद्दे उठा रहे थे. इसे लेकर आम आदमी पार्टी को लगा कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर चल रहे हैं और अपनी एक अलग इंडिपेंडेंस नेता की इमेज को प्रोजेक्ट करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके बाद राघव को राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया. राघव चड्ढा को लेकर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने भी अपनी भड़ास निकाली और यहां तक कह दिया कि राघव कॉम्प्रोमाइजड हैं.
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