
पंजाब सरकार ने आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर संपत्ति कर 5% बढ़ाया है। जानिए यह फैसला क्यों लिया गया, इसका कारण क्या है और करदाताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।
पंजाब सरकार ने राज्य के शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों पर कर दरों में 5% की बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी की है। यह संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रभावी रहेगा। मल्टीप्लेक्स को छोड़कर यह वृद्धि सभी प्रकार के मकानों, फ्लैटों और व्यावसायिक परिसरों पर लागू होगी।
केंद्र की शर्तें और पंजाब की मजबूरी- पंजाब सरकार
इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह है केंद्र सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) का वह आदेश, जिसके अनुसार राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत अतिरिक्त उधारी सीमा और वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए संपत्ति कर दरों को बढ़ाना होगा।
पंजाब सरकार ने केंद्र के इसी निर्देश के अनुपालन में अधिसूचना संख्या 3/1/21-11G3/786 दिनांक 5 जून, 2025 को जारी की है। इसमें कहा गया है कि संपत्ति कर की फ्लोर रेट्स को सर्कल रेट्स के अनुसार संशोधित किया गया है।
पुराने आदेशों का भी लिया गया संज्ञान
अधिसूचना में वर्ष 2021 के आदेशों (14 फरवरी और 26 अप्रैल) का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें 5% वार्षिक वृद्धि का प्रावधान था। अब इस संरचना को औपचारिक रूप से लागू कर राज्य सरकार ने कर प्रणाली में मानकीकरण (standardization) लाने की दिशा में कदम उठाया है।
कर बढ़ा तो क्या मिलेगा बदले में?
इस कदम से पंजाब सरकार को अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 0.25% अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति मिलेगी। इस अतिरिक्त वित्तीय संसाधन का उपयोग शहरी बुनियादी ढांचे और केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए किया जाएगा।
राज्य सरकार के अनुसार, इससे नगर निगमों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को रफ्तार मिलेगी।
जनता पर असर
हालांकि करदाताओं के लिए यह सीधे तौर पर आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है, लेकिन सरकार का दावा है कि इससे उन्हें लंबे समय में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। नई दरें उन लोगों को प्रभावित करेंगी जिनकी संपत्तियां शहरी इलाकों में हैं और जिनका कर मूल्य सर्कल रेट के आधार पर आंका जाता है।



