
नोवर्सिटी फाउंडेशन (Knowversity Foundation) द्वारा हीरोज़ ऑफ एशिया वॉल्यूम I का सफलतापूर्वक विमोचन इंडियन एसोसिएशन हॉल, बौबाजार, कोलकाता में किया गया. इस अवसर पर भारत एवं बांग्लादेश से आए गणमान्य अतिथियों, शोधकर्ताओं, सहयोगी लेखकों, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों तथा विशिष्टजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही.
नोवर्सिटी फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. शुभ्रो चक्रवर्ती की परिकल्पना एवं मार्गदर्शन में तैयार इस प्रकाशन का मुख्य उद्देश्य गुमनाम एवं अल्पज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर शोध करना, उनका दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण करना तथा उनकी प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है.
इस खंड में चापेकर बंधुओं, बसंत कुमार विश्वास, लेफ्टिनेंट सुनील कुमार बनर्जी, क्रांतिवीर हृदये रंजन चक्रवर्ती, सरदार बलबंत सिंह परदेसी, केदारेश्वर चौधुरी, बाली चरण दास, खड़गबल्लभ दास, परीक्षित मुखोपाध्याय, रफीजुद्दीन अहमद तथा पुरेंद्र नारायण नाथ सहित अनेक क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और योगदान को अभिलेखित किया गया है.
Grand Launch Of Heroes Of Asia Volume 1
कार्यक्रम में सायंतन बसु एवं बिमल शंकर नंदा सम्मानित अतिथि के रूप में तथा माणिक डोलुई एवं नीतीश विश्वास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. बांग्लादेश की अधिवक्ता लकी बच्चर, सहयोगी लेखिका एवं कंट्री कन्वीनर, HRCBM बांग्लादेश चैप्टर, ने अंतरराष्ट्रीय अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और इस पहल को भारत-बांग्लादेश के साझा ऐतिहासिक संबंधों का महत्वपूर्ण आयाम प्रदान किया.
अग्निमित्रा पॉल, डॉ. कल्याण चक्रवर्ती एवं कार्तिक महाराज व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उन्होंने पुस्तक विमोचन की सफलता तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को संरक्षित और सम्मानित करने के नोवर्सिटी फाउंडेशन के प्रयासों के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं.
नोवर्सिटी फाउंडेशन की ओर से डॉ. शुभ्रो चक्रवर्ती, संस्थापक; शुभेंदु बंद्योपाध्याय, सलाहकार; मंजू मुखोपाध्याय, संयोजक, पश्चिम बंगाल; तथा श्री देवाशीष नंदी, कोषाध्यक्ष सहित सहयोगी लेखक, शोधकर्ता एवं भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के सदस्य कार्यक्रम में सम्मिलित हुए.
हीरोज़ ऑफ एशिया के माध्यम से नोवर्सिटी फाउंडेशन उन ऐतिहासिक गाथाओं को सामने लाने का प्रयास कर रहा है, जो आज भी अनेक परिवारों की स्मृतियों, क्षेत्रीय अभिलेखों तथा बिखरे हुए ऐतिहासिक दस्तावेजों में संरक्षित हैं. इस पहल का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, त्याग, सत्यनिष्ठा, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण से युवा पीढ़ी को प्रेरित करना भी है.
कार्यक्रम ने फाउंडेशन के इस संकल्प को और सुदृढ़ किया: गुमनाम नायकों को स्मरण करें. उनकी विरासत को संरक्षित करें. युवा पीढ़ी को प्रेरित करें. राष्ट्र प्रथम.



