
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीसी) के अध्यक्ष और पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने गुरुवार को कहा कि सिख कैदियों को रिहा करने का मुद्दा जटिल है और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
चंडीगढ़ में एक बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौरान किए गए अपराधों के दोषी कई सिख कैदियों की रिहाई की मांग की गई थी। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मौत की सजा काट रहे बलवंत सिंह राजोआना के मामले का हवाला देते हुए ग्रेवाल ने कहा, ‘उन्हें तब तक रिहा नहीं किया जा सकता जब तक कि उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में नहीं बदला जाता। साथ ही उसने दया याचिका भी दायर नहीं की है। प्रक्रिया के अनुसार, ऐसे दोषी को अपराध के लिए खेद व्यक्त करते हुए दया याचिका दायर करनी होती है और यह आश्वासन देना होता है कि इसकी पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी। राजोआना ने इसके बजाय कहा है कि वह वही दोहराएंगे जो उन्होंने दूसरे जीवन में भी किया था। ऐसे में क्या किया जा सकता है?
ग्रेवाल ने स्पष्ट किया कि आयोग इस मामले में सीधे तौर पर शामिल नहीं था। उन्होंने कहा, ‘हमें कोई शिकायत या अभ्यावेदन नहीं मिला है। अगर हमें कोई मिलता है तो हम कानून के अनुसार काम करेंगे।
बेअंत सिंह हत्याकांड के एक अन्य दोषी जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल के मुद्दे पर ग्रेवाल ने जोर देकर कहा कि ऐसे मामले राजनीतिक के बजाय कानूनी हैं। उन्होंने कहा, ‘ये राजनीतिक मामले नहीं हैं, जैसा कि पंजाब में कुछ पार्टियां बनाने की कोशिश कर रही हैं.’



