
पिछले एक सप्ताह में बठिंडा, मानसा, फाजिल्का और फिरोजपुर जिलों में कथित तौर पर नशीली दवाओं के सेवन से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है, जो मालवा क्षेत्र में जारी नशीली दवाओं के खतरे को उजागर करता है। अकेले फाजिल्का जिले में तीन दिनों में कथित तौर पर तीन लोगों की ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई।
फाजिल्का जिले में अबोहर उपमंडल के दानेवाला सतकोसी गांव के 25 वर्षीय पवन कुमार की 18 अगस्त की शाम को कथित तौर पर ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई। इससे पहले 18 अगस्त को टाहलीवाला बोडला गांव के 20 वर्षीय करनजीत सिंह की कथित तौर पर ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई थी। परिवार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अरनीवाला पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनमें से एक को गिरफ्तार कर लिया है।
इससे पहले फाजिल्का जिले के अबोहर उपमंडल के पंजावा गांव निवासी 42 वर्षीय सुखजिंदर सिंह उर्फ काला की 17 अगस्त को गांव में संदिग्ध ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई थी। बठिंडा जिले में 14 अगस्त को बीर तालाब बस्ती में एक सुनसान जगह पर दो युवक मृत पाए गए थे, जिनकी बाहों में कथित तौर पर सीरिंज फंसी हुई पाई गई थी।
उनकी पहचान जयसिंहवाला गांव के 28 वर्षीय गुरविंदर सिंह और जोधपुर रोमाना गांव के 25 वर्षीय कुलदीप सिंह के रूप में हुई है। उनकी मौत ड्रग ओवरडोज के कारण होने का संदेह था। मानसा जिले में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाले 16 वर्षीय अमरीक सिंह की 11 अगस्त को सरदूलगढ़ में कथित तौर पर ड्रग ओवरडोज से मौत हो गई थी। अमरीक की बहन सोनू कौर ने कहा कि वे तीन बहनें और एक भाई हैं।
उन्होंने कहा, ‘अमरीक पिछले कुछ समय से ड्रग्स का आदी था। वह अपने दोस्तों के साथ बाहर गया था, और बाद में हमें उसकी मौत की जानकारी मिली। हम ड्रग पेडलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। इस बीच, फिरोजपुर जिले के टुट गांव के 45 वर्षीय पूर्व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी गुरजीत सिंह की 11 अगस्त की रात फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। खेल में नाम कमाने वाले गुरजीत कथित तौर पर नशे की लत से जूझ रहे थे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि वे मामले दर्ज कर रहे हैं और नियमित तलाशी अभियान चला रहे हैं और मादक पदार्थ बरामद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा, हमने ड्रग हॉटस्पॉट की पहचान की है और कई सुधारात्मक उपाय कर रहे हैं। समाज को भी अपनी भूमिका निभाने की जरूरत है, और नशे के आदी लोगों को भी इस आदत को छोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। चल रही ‘युद्ध नाशियां विरुद्ध’ सफल साबित हो रही है। यहां तक कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी बठिंडा की यात्रा के दौरान इस अभियान की सराहना की थी।
हालांकि, कुछ निवासियों ने इस दावे का विरोध किया और कहा कि डेटा-संचालित अभियानों के बजाय, अधिकारियों को नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।



