
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसित 25 नाम सरकार के पास लंबित हैं, जिनमें से सबसे पुराना नाम वकील सौरभ कृपाल का है, जो अक्टूबर 2017 के बाद से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार के पास उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए लंबित सिफारिशों की संख्या हाल के दिनों की तुलना में काफी कम हो गई है।
इन 25 नामों में दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास, पंजाब और हरियाणा और गुजरात उच्च न्यायालयों के अलावा अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर “बिखरे हुए” हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने पूर्व सीजेआई बीएन कृपाल के बेटे सौरभ कृपाल का नाम अक्टूबर 2017 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजा था।
लेकिन समझा जाता है कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने उनके नाम पर तीन बार विचार-विमर्श टाल दिया है। अंत में, तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने नवंबर 2021 में किरपाल के पक्ष में फैसला लिया। अगले साल नवंबर में सरकार ने उनकी फाइल पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को लौटा दी थी। कॉलेजियम द्वारा अपना रुख दोहराने के बाद फाइल लंबित है।
सूत्रों ने कहा कि किरपाल के अलावा दो अन्य नामों को छोड़कर सरकार के पास लंबित अन्य नाम अपेक्षाकृत नए हैं।
उच्च न्यायालय कॉलेजियम न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के लिए अपनी सिफारिशें केंद्रीय कानून मंत्रालय के न्याय विभाग को भेजते हैं।
विभाग सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजने से पहले अनुशंसाकर्ता या उम्मीदवार के बारे में आईबी रिपोर्ट सहित विवरण जोड़ता है।
कॉलेजियम अपने विवेक से या तो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए नाम की सिफारिश करता है या फाइल को उच्च न्यायालय कॉलेजियम को लौटा देता है।
25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 1,122 है।
304 रिक्तियों के साथ, काम करने वालों की संख्या 818 न्यायाधीशों की है। प्रतिशत के हिसाब से उच्च न्यायालय के 27 प्रतिशत पद वर्तमान में खाली हैं।



