उज्जैन में ढहा 14वीं शताब्दी का महाकाल द्वार, भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण ऐतिहासिक धरोहर जमींदोज

श्री महाकालेश्वर मंदिर के उत्तर में स्थित 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक ‘महाकाल द्वार’ जमींदोज हो गया। जिस विरासत को सहेजने के नाम पर महज तीन साल पहले (वर्ष 2021-22 में) स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत दो करोड़ रुपये से अधिक फूंक दिए गए थे, वह अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही की बलि चढ़ गया।
बिना किसी सुरक्षात्मक उपाय के जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई
पर्यटन विभाग के ‘सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल’ के समीप थाना भवन को तोड़कर 77 मीटर लंबा और 3.74 मीटर चौड़ा मार्ग बनाया जा रहा था। इस निर्माण के दौरान महाकाल द्वार से सटाकर बिना किसी सुरक्षात्मक उपाय के भारी-भरकम जेसीबी मशीनों से गहरी खुदाई कर दी गई।
न रिटेनिंग वॉल बनाई, न सपोर्ट दिया
निर्माण एजेंसी ने मिट्टी की कटाई करते समय ढलान को थामने के लिए न तो रिटेनिंग वॉल खड़ी की और न ही ऐतिहासिक संरचना की मजबूती का तकनीकी आकलन किया। परिणामस्वरूप, जरा सी बारिश और मिट्टी के कटाव से सदियों पुराना बसाल्ट पत्थर और ईंटों का यह ढांचा धराशायी हो गया।
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