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Health Tips For Women: प्रेग्नेंट महिला को हेपेटाइटिस होने पर बच्चे को उससे कैसे बचाएं? एमआईएम डॉक्टर से पता करें

Health Tips For Women:  यह वायरल संक्रमण हेपेटाइटिस कहलाता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचाता है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह बहुत खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक बन सकता है।

Health Tips For Women:  प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला को हेपेटाइटिस हो सकता है, जो उसके और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के लिए घातक हो सकता है। लिवर को हेपेटाइटिस नामक वायरल संक्रमण प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस A, B, C, D और E इसके कई प्रकार हैं। प्रेगनेंसी में हेपेटाइटिस B और C सबसे खतरनाक हैं क्योंकि वे मां से बच्चे में फैल सकते हैं। इससे नवजात शिशु गंभीर लिवर इंफेक्शन और भविष्य में लिवर कैंसर या सिरोसिस का खतरा रहता है। ऐसे में आइए जानें, इससे बचाव कैसे करें।

Healthline ने बताया कि हेपेटाइटिस एक वायरल संक्रमण है, जिसका जन्म कई कारणों से हो सकता है। इसमें संक्रमित खून या दूषित सुइयों का इस्तेमाल, जैसे किसी पुरानी सुई से इंजेक्शन करना या असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन करना शामिल है। यह संक्रमण असुरक्षित इंटरकोर्स से भी फैल सकता है। हेपेटाइटिस A और E अक्सर खाद्य पदार्थों या पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस B और C संक्रमित मां से बच्चे में फैल सकते हैं। टैटू या पियर्सिंग करते समय उपकरण को सही से स्टरलाइज नहीं करना संक्रमण को भी बढ़ा सकता है।

हेपेटाइटिस से होने वाले बच्चे को कैसे बचाएं?

डॉ. राकेश बागड़ी, एम्स दिल्ली के पैड्रेट्रिक विभाग में बताते हैं कि अगर प्रेग्नेंट महिला को हेपेटाइटिस B है, तो नवजात शिशु को जन्म के 12 घंटे के भीतर दो इंजेक्शन दिए जाते हैं: हेपेटाइटिस B वैक्सीन और HBIG (हेपेटाइटिस B इम्यूनोग्लोबुलिन)। बच्चे की इम्यूनिटी इन दो टीकों से मजबूत होती है और संक्रमण का खतरा लगभग शून्य हो जाता है। इसके बाद बच्चे को 6 महीने के भीतर दो और डोज दी जाती हैं।

यदि महिला को हेपेटाइटिस C है, तो फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है; हालांकि, जन्म के बाद शिशु को समय-समय पर जांच और निगरानी करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस दौरान डिलीवरी की प्रक्रिया और समय निर्धारित किया जाता है ताकि बच्चे में संक्रमण का खतरा कम हो।

इन बातों पर खास ध्यान दें

हेपेटाइटिस की जांच प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही करवाएं।

दूषित भोजन-स्वच्छता का ध्यान रखें और पानी से बचें।

किसी भी इंजेक्शन, दवा, टैटू या पियर्सिंग से पहले उपकरणों को साफ करने के लिए जांच करें।

अगर हेपेटाइटिस पॉजिटिव हैं, तो नवजात को समय पर वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन दिलवाएं

ब्रेस्ट फीडिंग को लेकर डॉक्टर की सलाह जरूर लें

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