
Punjab Governor:
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित दोनों पदों पर बने रह सकते हैं। केंद्रीय सरकार ने उनके इस्तीफे को, जो कई दिन पहले दिया गया था, स्वीकार नहीं किया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद बनवारी लाल पुरोहित ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। केंद्र सरकार ने अभी तक बनवारी लाल पुरोहित के इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
वर्तमान में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होने के संकेत हैं। इस्तीफे के बाद से बनवारी लाल पुरोहित बहुत सक्रिय होकर काम कर रहे हैं। उन्हें UTS, चंडीगढ़ में अधिकारियों से दोबारा मीटिंगें लेनी शुरू कर दी है और अधिकारियों से जवाब भी लेना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब की समस्याओं में भी एक बार फिर रुचि दिखाई है। सोमवार को उन्होंने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने छठे दौरे का कार्यक्रम घोषित किया।
Purohit 20 फरवरी से 23 फरवरी, 2024 तक फिर से सीमावर्ती क्षेत्रों का महत्वपूर्ण दौरा करेंगे। पिछले ढाई वर्षों में वह छठी बार सीमा पार करेंगे। राज्यपाल अपने इस दौरे में पठानकोट, गुरुदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का के सीमावर्ती जिलों में जाएंगे। केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठकें करना और पिछले दौरों में हुई प्रगति की समीक्षा करना उनकी इस यात्रा का उद्देश्य है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को एकजुट करना है।
भगवंत मान की सरकार के साथ टकरार
राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित की भगवंत मान की सरकार के साथ पंजाब के मुद्दों पर संघर्ष जारी है। राज्यपाल ने कई बिलों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तल्ख टिप्पणी के बाद इनमें से कुछ को भी क्लीयर कर दिया। बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बीच कई अन्य मुद्दों पर भी विवाद हुआ, जो सार्वजनिक रूप से जाना जाता था। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्यपाल केंद्र सरकार के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं ताकि पंजाब सरकार काम नहीं कर सके और उसे बदनाम कर दिया जाए। राज्यपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में दौरे का उद्देश्य सीमा पार से नशे की खेप और अन्य मुद्दों की जांच करना है।
बीते दिनों चंडीगढ़ यूटी प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित के एडवाइजर राजीव वर्मा ने पदभार ग्रहण किया। पुरोहित भी उनके साथ बहुत समय बिताया। बाद में ट्रांसपोर्ट विभाग ने सचिवालय से सीटीयू बस सेवा शुरू की, जिसकी पुरोहित ने ही शुरुआत की। पुरोहित ने भी अधिकारियों के साथ बैठकें करके कई परियोजनाओं की समीक्षा रिपोर्ट ली। जिस तरह से इस्तीफा देने के बाद बनवारी लाल पुरोहित अपने कामकाज में फिर से सक्रिय हुए हैं, उससे प्रतीत होता है कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से अभी भी इन पदों पर रहने को कहा गया है। इसकी एक वजह यह भी है कि आचार संहिता लागू होने और जल्द ही लोकसभा चुनावों की घोषणा हो सकती है। उन्हें ही लोकसभा चुनाव तक केंद्र सरकार बनाए रख सकती है। कोई नया बदलाव इसके बाद ही किया जा सकता है।
मेयर चुनाव पर भी हुई थी किरकिरी
चंडीगढ़ प्रशासन पर भी भेदभाव के आरोप लगे मेयर चुनाव में भी। शासन के वरिष्ठ अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया गया। बतौर प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित पर भी आरोप लगाया गया कि वे अफसरों पर नियंत्रण नहीं रखते हैं। विपक्षी पार्टियों, आप और कांग्रेस, ने बनवारी लाल पुरोहित को भाजपा के मोहरे के तौर पर काम करने का आरोप लगाया है। नई दिल्ली के दौरे के बाद बनवारी लाल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में मेयर के चुनाव की सुनवाई से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मेयर चुनाव और रिटर्निंग अफसर की भूमिका पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। अब कोर्ट में इस मसले की अगली तारीख 19 फरवरी है।
रिपोर्ट- साजन शर्मा



