ड्रोन और AI रोकेंगे दंगा? संभल हिंसा के बाद UP पुलिस को मिले 31 टिप्स, गर्म तेल से भी ऐसे बचेंगे

उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी गई है. संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद गठित आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए 31 सुझाव दिए हैं. इन सिफारिशों में ड्रोन से संवेदनशील इलाकों की निगरानी, घरों की छतों की जांच, CCTV कैमरों का सत्यापन, खुफिया तंत्र मजबूत करना, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर नजर रखना और पुलिस को दंगा नियंत्रण के लिए पहले से तैयार रखने जैसे उपाय शामिल हैं.
आयोग का मुख्य जोर इस बात पर है कि पुलिस किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही संभावित खतरे की पहचान करे और उसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए. आयोग के सुझावों में तकनीक के इस्तेमाल पर भी खास जोर दिया गया है. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी करने और छतों पर ईंट, पत्थर, बोतल या दूसरी ऐसी चीजें जमा होने की जांच करने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान किया जा सकता है. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल पिछली घटनाओं के डेटा को देखकर संभावित परेशानी वाले स्थानों और लोगों की पहचान करने में मददगार बताया गया है.
24 नवंबर को क्या हुआ था?
आयोग की रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए बताया गया है कि जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान पुलिस बल पर कुछ छतों से ईंट-पत्थर फेंके गए. रिपोर्ट में कुछ महिलाओं के भी पुलिस पर पत्थरबाजी करने और बाद में गिरफ्तार किए जाने की बात भी बताई गई है. आयोग ने अपने सुझावों में यह भी कहा है कि अतीत में ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई रोकने के लिए छतों से गर्म तेल, गर्म पानी और मिर्च पाउडर फेंकने जैसी घटनाएं देखी गई हैं.
आयोग की सिफारिशों को मोटे तौर पर इन हिस्सों में समझा जा सकता है-
ड्रोन और मैनुअल तरीके से संवेदनशील छतों की निगरानी
ईंट, पत्थर और बोतल जैसी चीजों को जमा होने से रोकना
महिला पुलिसकर्मियों के साथ संवेदनशील छतों पर निगरानी
बाहरी लोगों और संदिग्ध गतिविधियों का सत्यापन
हिस्ट्रीशीटरों और संभावित उपद्रवियों पर नजर
CCTV, वीडियो रिकॉर्डिंग और खुफिया तंत्र को मजबूत करना



