‘पड़ोसी टिकट नहीं होने दे रहे…’ अखिलेश के इस तंज के पीछे संजय निषाद-ओपी राजभर का विवाद या कुछ और?

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी के भीतर चल रही कथित खींचतान और राजनीतिक पदों की वरिष्ठता पर सवाल उठाए हैं. उनके पोस्ट में ‘जिनकी खुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे’ वाली टिप्पणी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. अखिलेश ने इस पोस्ट में किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है. इस सीट पर ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद की दावेदारी को लेकर पहले से विवाद सामने आ चुका है. अखिलेश ने अपने पोस्ट में ‘5 बड़ा या 7?’ को लेकर भी चर्चा की है, जिसे अलग-अलग तरह से देखा जा रहा है.

अखिलेश यादव ने क्या लिखा?

अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, ‘जिनकी खुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे हैं, वो चुप ही रहें तो ही उनका सम्मान बचा रहेगा.’ उन्होंने आगे लिखा कि संबंधित टिप्पणी ‘दुष्मुखी’ के वचनों से प्रेरित लगती है. भगवान कृष्ण के एक अन्य नाम ‘रणछोड़’ का नकारात्मक अर्थ में इस्तेमाल किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई. अखिलेश ने इसे सीमित और संकीर्ण ज्ञान बताते हुए समाज के लिए घातक करार दिया. हालांकि, इस पोस्ट में उन्होंने न तो ओम प्रकाश राजभर का नाम लिया और न ही अतरौलिया सीट का सीधा जिक्र किया.

राजभर और संजय निषाद के बीच क्या विवाद?

अखिलेश की ‘पड़ोसी’ वाली टिप्पणी को अतरौलिया सीट पर ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद के बीच चल रही दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल साल 2022 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया सीट बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में निषाद पार्टी के खाते में गई थी. पार्टी ने यहां से प्रशांत सिंह को उम्मीदवार बनाया था, जबकि समाजवादी पार्टी के संग्राम यादव ने जीत दर्ज की थी. बता दें उस समय राजभर की सुभासपा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी. जुलाई 2023 में राजभर फिर एनडीए में शामिल हो गए और निषाद पार्टी भी इसी गठबंधन का हिस्सा रही.

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