धर्म

पितृ पक्ष में अकाल मृत्यु वालों के लिए क्यों खास है चतुर्दशी? जानें श्राद्ध से जुड़े जरूरी नियम और उपाय

पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। पितृ पक्ष में हर तिथि का अपना अलग महत्व है। आमतौर पर लोग दिवंगत परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। लेकिन जिनका निधन अल्प आयु में या किसी अप्रत्याशित कारण से हो जाता है, उनके लिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष कर्म करने का विधान है। आइए जानते हैं अकाल मृत्यु वालों के लिए चतुर्दशी क्यों खास है और इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए।

क्या है अकाल मृत्यु?

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निर्धारित उम्र से पहले हो जाती है, तो धार्मिक परंपराओं में इसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। दुर्घटना, आग, गंभीर बीमारी, विष आदि कारणों से कम आयु में होने वाली मृत्यु को इससे जोड़कर देखा जाता है। ऐसे दिवंगत परिजनों के लिए पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध का विधान बताया गया है।

चतुर्दशी तिथि क्यों खास?

अकाल मृत्यु वाले पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि निर्धारित है, जिसे चतुर्दशी श्राद्ध कहा जाता है। इस तिथि का संबंध भगवान शिव से होने के कारण इस दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।। ऐसे में इस दिन शिव आराधना करके दिवंगत परिजन की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है।

ऐसे करें अभिषेक

चतुर्दशी श्राद्ध के दिन सुबह स्नान के बाद एक लोटे में गंगाजल और पवित्र जल लें। इसमें काले तिल डालें। इसके बाद अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए परिजन के नाम से शिव जी का अभिषेक करें। इस दौरान महादेव से दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना करें। मान्यता है कि इस कर्म का पुण्य फल दिवंगत को समर्पित किया जा सकता है।

श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ

पितृ पक्ष के दौरान अकाल मृत्यु वाले परिजन के लिए श्रीमद्भागवत पुराण के महात्म्य का पाठ करना या उसे सुनना भी विशेष माना गया है। पितृ पक्ष के 15 दिनों में इसका पाठ या श्रवण करने से दिवंगत जीवात्मा की शांति और मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है।

श्राद्ध का शुभ समय

पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त 12:31 से 1:18 बजे तक और अपराह्न काल 1:18 से 3:38 बजे तक रहेगा। इन्हीं समयावधियों में श्राद्ध और तर्पण से जुड़े कर्म किए जा सकते हैं।

Related Articles

Back to top button