धर्म

पितृ पक्ष में गया जी में कैसे कराएं पितरों का पिंडदान? जानें सही रूट, बजट और पंडित जी की दक्षिणा की पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। पितरों को प्रसन्न करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को पूर्वजों की अपार कृपा मिलती है। देश में कई स्थान ऐसे हैं जहां श्राद्ध कर्म करना अच्छा माना जाता है लेकिन बिहार के गया जी का खास महत्व है। मान्यता है कि गया जी में पितरों का पिंडदान करने से  108 कुल और सात पीढ़ियों तक का उद्धार होता है। तो आइए जानते हैं कि गया जी में पिंडदान कैसे कराएं और यहां कैसे पहुंचें।

पितृ पक्ष मेला 2026

बता दें कि हर साल पितृ पक्ष में गया जी में पक्ष मेला का आयोजन किया जाता है। इस दौरान दुनिया भर से लोग अपने पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने आते हैं। गया में पिंडदान के लिए 48 प्रमुख वेदियां हैं लेकिन  इनमें भी विष्णुपद मंदिर, गया शिरोमणि मंदिर, फल्गु नदी, पंचतीर्थ और सीता कुंड का महत्व सबसे अधिक है। इस साल गया जी में पितृ पक्ष का मेला 25 सितंबर से आरंभ हुआ है जो कि 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।  10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या है और इस दिन उन पितरों का श्राद्धकर्म किया जाता है जिनकी  मृत्यु तिथि का पता न हो।

गया जी में पिंडदान में कितना खर्चा आता है?

पितृ पक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं इसलिए ट्रेन टिकट और रुकने की जगह की बुकिंग पहले से जरूर कर लें। अगर आप दिल्ली से गया जी जा रहे हैं तो  ट्रेन की टिकट 500 रुपये से शुरू होकर उसकी क्लास के हिसाब से 3000 तक पहुंच सकती है। वहीं फ्लाइट से जाने का 3000 से शुरू होकर 10,000 तक जा सकती है। गया में ठहरने का खर्चा  व्यक्ति की सुविधा के हिसाब से 3000 से 7000 की बीच आ सकता है।

गया जी में पिंडदान, श्राद्ध और पूजा-पाठ का खर्चा 2100 से 5100 और ₹11,000 तक भी आ सकता है। पिंडदान की खर्चा राशि  अलग भी हो सकती है। श्राद्ध कर्म शुरू करने से पहले पंडित जी से पूजन सामग्री, संकल्प और दक्षिणा का कुल खर्च पहले से तय कर लें ताकि बाद में कोई असमंजस न हो।  संभव हो तो अपने वंश, कुल के अधिकृत गयावाल पंडा जी से ही संपर्क करें।

गया जी में पिंडदान का धार्मिक महत्व

गया जी बिहार राज्य की फल्गू नदी के किनारे मगध क्षेत्र में स्थित यह सबसे प्राचीन और पवित्र तीर्थ स्थानों में से एक है, जहां अपने पुरखों का पिंडदान करने बहुत से लोग जाते हैं। यही वो स्थान है, जहां बोधि नामक पेड़ के नीचे भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। विष्णु पुराण और वायु पुराण में इसे मोक्ष की भूमि कहा गया है। माना जाता हैं यहां स्वयं विष्णु पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं। यहां किया गया पिंडदान 108 कुल और सात पीढ़ियों तक का उद्धार करने वाला है। कहते हैं स्वयं ब्रह्मा जी ने अपने पूर्वज़ों का पिंडदान गया में फल्गु नदी के तट पर किया था।

वहीं त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान यहीं किया था। बताया जाता है कि- यहां 360 वेदियां थीं, लेकिन अब केवल 48 ही रह गयी हैं, जहां पर पितरों का पिंडदान किया जाता है। यहीं पर एक जगह है- अक्षयवट, जहां पितरों के निमित दान करने की भी परंपरा है। यहां किया गया दान अक्षय होता है। जितना दान किया जाए, उतना ही पुण्य आपको वापस जरूर मिलता है। बता दें कि गया जी के इस मंदिर में व्यक्ति जीवित रहते हुए खुदा का पिंडदान और श्राद्ध कराते हैं।

गया जी कैसे पहुंचे?

पितृ पक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं इसलिए ट्रेन टिकट और रुकने की जगह की बुकिंग पहले से जरूर कर लें। अगर आप दिल्ली से गया जी जा रहे हैं तो  ट्रेन की टिकट 500 रुपये से शुरू होकर उसकी क्लास के हिसाब से 3000 तक पहुंच सकती है। वहीं फ्लाइट से जाने का 3000 से शुरू होकर 10,000 तक जा सकती है। गया में ठहरने का खर्चा  व्यक्ति की सुविधा के हिसाब से 3000 से 7000 की बीच आ सकता है।

गया जी पहुंचने के लिए बिहार की राजधानी पटना या उसके आसपास किसी भी बड़े शहर पहुंचना होगा। वहां से आपको गया के लिए आसानी से मिल जाएगी। अगर आप पटना से जा रहे हैं तो आपको गया तक पहुंचने में 2 घंटे तक का समय लग सकता है। इसके बाद गया जी जंक्शन पर उतरकर वहां से ऑटो या टैक्सी की मदद से पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं।  पटना से सड़क के रास्ते गया तक पहुंचने के लिए आप बस, टैक्सी या प्राइवेट कार कर सकते हैं।

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