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बुलेट ट्रेन के लिए बनेगा अलग रेलवे स्टेशन, जानिए कानपुर में कहां होगा ठहराव? सांसद ने बताया पूरा प्लान

देश में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर हलचल तेज हो रही है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के कानपुर से इस हाई स्पीड रेल सेवा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने बताया है कि शहर में बुलेट ट्रेन का स्टेशन बनाने के लिए अटल घाट के पास या शहर के भीतर टनल के जरिए स्टेशन तैयार करने के प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही उनके मुताबिक प्रस्तावित रूट में बदलाव कर आगरा से कानपुर होते हुए लखनऊ तक कनेक्टिविटी का रास्ता तैयार किया गया है. इससे कानपुर के लोगों में उम्मीद जगी है कि उन्हें भी बुलेट ट्रेन से सीधे जुड़ने का मौका मिल सकता है. हालांकि, स्टेशन की अंतिम जगह और निर्माण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का अभी इंतजार है.

कानपुर में कहां बनेगा बुलेट ट्रेन का स्टेशन?

कानपुर में बुलेट ट्रेन के स्टेशन की जगह को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं. लोगों की दिलचस्पी इस बात में है कि हाई स्पीड ट्रेन शहर के किस हिस्से में रुकेगी और यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए कितनी दूरी तय करनी पड़ेगी. अब सांसद रमेश अवस्थी ने इस संबंध में जानकारी साझा की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने यह पक्ष रखा है कि स्टेशन ऐसी जगह बनाया जाए, जहां कानपुर के आम नागरिकों को आने-जाने में अधिकतम सुविधा मिल सके. इसी उद्देश्य से अटल घाट के पास स्टेशन बनाने या शहर के भीतर टनल के जरिए स्टेशन तैयार करने के प्रस्ताव पर काम शुरू हुआ है. इन दोनों विकल्पों पर आगे तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं के आधार पर विचार किया जाना है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से किस विकल्प को अंतिम मंजूरी मिलेगी. स्टेशन की लोकेशन, निर्माण की तकनीक और काम पूरा होने की समयसीमा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा. अगर शहर के भीतर स्टेशन बनाने का विकल्प संभव हुआ तो यात्रियों को बाहरी इलाके तक जाने की जरूरत कम हो सकती है. इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है.

आगरा से कानपुर होते हुए लखनऊ तक जुड़ सकता है रूट

सांसद रमेश अवस्थी ने बुलेट ट्रेन के प्रस्तावित रूट को लेकर भी जानकारी दी है. उनके मुताबिक पहले प्रस्तावित रूट में बदलाव करवाकर आगरा से सीधे कानपुर होते हुए लखनऊ तक कनेक्टिविटी जोड़ने का काम किया गया है. यह बदलाव कानपुर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे शहर को हाई स्पीड रेल नेटवर्क में जगह मिलने की संभावना बढ़ेगी. अभी इन शहरों के बीच सफर करने के लिए यात्रियों को मौजूदा रेल या दूसरे परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है. प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार होने पर आगरा, कानपुर और लखनऊ के बीच तेज रफ्तार रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है. कानपुर उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है. यहां कारोबार, नौकरी, पढ़ाई और इलाज के सिलसिले में बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं. ऐसे में इन शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी से लोगों का समय बच सकता है. हालांकि, रूट और स्टेशन से जुड़ी अंतिम व्यवस्था परियोजना के आधिकारिक स्वरूप के बाद ही स्पष्ट होगी.

दिल्ली से कानपुर केवल 1 घंटे 45 मिनट में?

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इससे पहले वाराणसी में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को लेकर जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली को आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या से जोड़ते हुए आगे वाराणसी, प्रयागराज और पटना तक कनेक्टिविटी स्थापित करेगा. रेल मंत्री के मुताबिक इस कॉरिडोर के तैयार होने पर दिल्ली से कानपुर की यात्रा करीब 1 घंटे 45 मिनट में पूरी हो सकेगी. वहीं दिल्ली से आगरा पहुंचने में लगभग 59 मिनट और दिल्ली से लखनऊ जाने में करीब 2 घंटे 12 मिनट लगने का अनुमान है. ये समय प्रस्तावित योजना के तहत बताए गए हैं. वास्तविक यात्रा अवधि रूट, स्टेशनों और परियोजना के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगी.

वाराणसी से लखनऊ और प्रयागराज का सफर भी होगा कम

रेल मंत्री ने नॉर्थ कॉरिडोर के तहत दूसरे शहरों के बीच प्रस्तावित यात्रा समय की जानकारी भी साझा की थी. उनके मुताबिक बुलेट ट्रेन से वाराणसी से लखनऊ पहुंचने में करीब 1 घंटा 21 मिनट लग सकते हैं. वाराणसी से पटना का सफर लगभग एक घंटे में पूरा होने का अनुमान है. वहीं वाराणसी से दिल्ली पहुंचने में करीब 3 घंटे 33 मिनट लगने की बात कही गई थी. वाराणसी से प्रयागराज के बीच की यात्रा भी महज 33 मिनट में पूरी होने का प्रस्तावित समय बताया गया. इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कॉरिडोर तैयार होने पर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय कम हो सकता है. हालांकि, अभी ये सभी प्रस्तावित समय हैं. अंतिम रूट और स्टेशनों के निर्धारण के बाद इनमें बदलाव संभव है.

हर एक घंटे में बुलेट ट्रेन चलाने की योजना

अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया था कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन सेवाओं को हर एक घंटे के अंतराल पर संचालित करने की योजना है. यानी यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए बहुत लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इस व्यवस्था से उन लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें काम, कारोबार, पढ़ाई या इलाज के लिए नियमित रूप से दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है. मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे कारोबारियों, एमएसएमई सेक्टर से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों के लिए भी तेज रेल कनेक्टिविटी उपयोगी हो सकती है. हालांकि, ट्रेन के संचालन का वास्तविक समय, सेवाओं की संख्या और किराये जैसी जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं. इनका निर्धारण परियोजना के आगे बढ़ने और संचालन से जुड़ी योजना तैयार होने के बाद होगा.

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