उत्तर प्रदेशराज्य

‘रात के अंधेरे में एक नेता से मुलाकात’ के दावों पर दिव्या मित्तल का पलटवार, Ex- IAS ने दिया करारा जवाब!

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान करते हुए अपने इस्तीफे के बाद लगाए गए एक दावे पर भी आज  पलटवार किया. उन्होंने कहा कि इस्तीफे के कुछ घंटों बाद एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता की ओर से उनके बारे में कहा गया कि उन्होंने रात के अंधेरे में दूसरी बड़ी पार्टी के एक बड़े नेता से मुलाकात की थी. दिव्या मित्तल ने इस दावे को सीधे तौर पर खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं थी.

‘वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी’

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में इस पूरे मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उनके इस्तीफे के बाद उन्हें आम लोगों की ओर से काफी समर्थन मिला. लेकिन इसी दौरान एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर उनके बारे में लिखा कि वह रात के अंधेरे में दूसरी बड़ी पार्टी के एक बड़े नेता से मिली थीं. दिव्या मित्तल ने इस दावे पर कहा, ‘वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी. यह बात लिखने वाले को भी पता थी.” उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक यह बात सच बताने के लिए नहीं लिखी गई थी.

‘एक औरत को पहले ही दिन डरा दो’

दिव्या मित्तल ने आरोप लगाया कि इस तरह की बात लिखने का उद्देश्य एक महिला को डराना था, जो सवाल पूछने के लिए आगे आई है. उन्होंने कहा, ‘उद्देश्य था कि एक औरत जो सवाल पूछने निकली है, उसको पहले ही दिन डरा दो.” उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों को FIR और ट्रोलिंग के जरिए डराने की कोशिश की जाती है. उनके मुताबिक इस तरह का माहौल आम लोगों और अच्छे लोगों को राजनीति में आने से रोक सकता है.

‘मैं डरूंगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूंगी’

दिव्या मित्तल ने कहा कि वह इस तरह की कोशिशों से डरने वाली नहीं हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘और हमें इसी को बदलना है. इसलिए मैं डरूंगी नहीं. मैं सवाल ही पूछूंगी.” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने IAS से इस्तीफा देने के बाद अपने अगले कदम का ऐलान करते हुए राजनीति में उतरने की बात कही. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि लोगों के साथ राजनीति करने की बात कह रही हैं.

‘सिर्फ नेता बदलना नहीं, राजनीति बदलनी है’

दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक कदम को लेकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं है. वह राजनीति के तौर-तरीके को बदलने की बात कर रही हैं. उन्होंने राजनीति में इरादे, न्याय, फिक्र और सोच को महत्व देने की बात कही. उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति नहीं चाहतीं जिसमें लोगों को केवल गिनती के तौर पर देखा जाए और उन्हें सत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनाया जाए. उनके मुताबिक, राजनीति में लोगों की बात सुनी जानी चाहिए और ‘लोग ही तो मंजिल हैं.”

‘किसी दल के साथ नहीं, केवल लोगों के साथ’

दिव्या मित्तल ने यह भी साफ किया कि वह अपनी राजनीतिक यात्रा किसी राजनीतिक झंडे के नीचे शुरू करने की बात नहीं कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैं राजनीति करूंगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आपके साथ, केवल लोगों के साथ.” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और राजनीतिक शुरुआत भी यहीं से होगी. इस्तीफे के बाद अपने अगले कदम को लेकर बनाए गए सस्पेंस को खत्म करते हुए उन्होंने 29 सितंबर को राजनीति में उतरने का ऐलान किया.

इस दौरान ‘रात के अंधेरे में बड़े नेता से मुलाकात’ के दावे को लेकर उनका बयान भी चर्चा में आया. दिव्या मित्तल ने इसे गलत बताते हुए कहा कि वह मुलाकात कभी हुई ही नहीं थी और वह इस तरह की बातों से डरेंगी नहीं, बल्कि सवाल पूछती रहेंगी.

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