
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में वाहनों के उत्सर्जन को एक बड़ा योगदानकर्ता करार दिया और कहा कि बढ़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की स्वत: संज्ञान लेते हुए एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर में ‘बंपर टू बंपर’ यातायात पर भी चिंता व्यक्त की।
सीजेआई ने कहा, “हम बात करते रहते हैं, कभी-कभी बयान और सुझाव देते हैं, लेकिन मुद्दा यह है कि एक्यूआई पहले से ही 400 को छू रहा है।
पीठ ने गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित पड़ोसी क्षेत्रों से दिल्ली को जोड़ने वाली सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहनों के चलने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘दिल्ली की सड़कों और दिल्ली को एनसीआर से जोड़ने वाली सड़कों को देखिए। किसी भी सड़क और उन पर चलने वाले वाहनों के प्रकार पर एक नज़र डालें। यह बड़ी समस्या है, “सीजेआई ने कहा।
पीठ ने कहा कि गरीब लोग ही असली पीड़ित हैं, क्योंकि वे सड़कों पर हैं, और इसके अलावा, त्योहारों का समय ही एकमात्र ऐसा समय होता है जब वे आजीविका कमाते हैं।
पराली जलाने पर पीठ ने किसानों को खेतों में आग लगाने के बजाय मशीनों का इस्तेमाल करने के बारे में शिक्षित करने की जरूरत पर जोर दिया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक निश्चित स्तर से ऊपर बढ़ने पर सभी आयु वर्ग के छात्रों के लिए स्कूलों को बंद करने या उन्हें हाइब्रिड मोड में चलाने की मांग करने वाली याचिका पर पीठ ने कहा कि वह विशेषज्ञों की राय पर ध्यान देगी।
केंद्र और अन्य प्राधिकरणों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पांच प्रमुख क्षेत्रों को कवर करने वाले नियामक ढांचे का उल्लेख किया: औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस धूल, सड़क की धूल और पराली जलाना।
उन्होंने पीठ को बताया कि कई उपाय किए गए हैं, जिनमें कुछ वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध, प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्रों की जियो-टैगिंग और अनुप्रयोगों और सोशल मीडिया पर प्राप्त शिकायतों के माध्यम से स्पष्ट रूप से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
भाटी ने पीठ को बताया कि गुरुवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने से 14 प्रतिशत प्रदूषण होता है।
पीठ ने कहा कि वह कुछ आदेश पारित करेगी और दिवाली की छुट्टी के बाद अदालत के फिर से खुलने के बाद 16 नवंबर को याचिका पर सुनवाई करेगी।
राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को धुंध की मोटी परत छाई रही क्योंकि वायु गुणवत्ता तेजी से खराब हो गई और ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब पहुंच गई, कुल एक्यूआई 391 पर आ गया।
शहर भर के 59 निगरानी स्टेशनों में से 30 में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ दर्ज की गई, जबकि शेष ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थे।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में सबसे खराब एक्यूआई 475 दर्ज किया गया, इसके बाद आईआईटी दिल्ली में 472 दर्ज किया गया।



