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अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिल गई, लेकिन उनके पास क्या-क्या अधिकार नहीं हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देते समय कुछ शर्ते भी लगाई हैं। केजरीवाल को न्यायालय की शर्तों को मानना होगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आज सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी। इसके अलावा, कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। केजरीवाल को 50 हजार रुपये का निजी  मुचलके देना होगा। वह न तो दिल्ली सचिवालय जाएंगे न मुख्यमंत्री दफ्तर जाएंगे। कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अनुमति के बिना सीएम केजरीवाल किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे। वह शराब नीति घोटाले में अपनी भूमिका को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। साथ ही वह किसी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे।

अरविंद केजरीवाल क्या-क्या नहीं कर सकेंगे

  1. अरविंद केजरीवाल मामले से जुड़ी आधिकारिक फाइल नहीं देख सकेंगे या किसी गवाह से बातचीत करेंगे।
  2. केजरीवाल को तिहाड़ जेल से रिहाई के लिए पचास हजार रुपये की जमानत और मुचलका भरना होगा।
  3. अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आबकारी नीति घोटाले से संबंधित मनी लांड्रिंग मामले में अपनी भूमिका पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
  4. अरविंद केजरीवाल दिल्ली सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय नहीं जाएंगे।
  5. बिना उपराज्यपाल की अनुमति के किसी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे या किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे।

केजरीवाल को चुनाव परिणामों से पहले सरेंडर करना होगा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दी, जो उन्हें बड़ी राहत दी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि दो जून को गिरफ्तार केजरीवाल को कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में आत्मसमर्पण करना चाहिए और जेल वापस जाना चाहिए। केजरीवाल के वकील अभिषेक सिंघवी ने पीठ से अनुरोध किया कि उन्हें पांच जून तक अंतरिम जमानत दी जाए। एक जून को लोकसभा चुनाव का सातवां और अंतिम चरण होगा। चार जून को मतगणना होगी।

कोर्ट ने ये टिप्पणी की

पीठ ने कहा कि ED की “प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट” अगस्त 2022 में दर्ज की गई थी जब मुख्यमंत्री को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने ED को बताया, “वह डेढ़ साल तक बाहर रहे।” वे पहले या बाद में गिरफ्तार हो सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेहता और राजू ने न्यायालय से जमानत शर्तें लागू करने की मांग की, जिनमें यह भी शामिल था कि केजरीवाल आबकारी नीति मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे। पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तें समान होंगी जैसे संजय सिंह, एक “आप” नेता के मामले में थीं। इसी मामले में पिछले महीने संजय सिंह को जमानत मिली थी।

 

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