राज्यबिहार

पहाड़ों के बीच बंजर जमीन पर उगाई सफलता: गया की सुषमा ने खेती, डेयरी और मत्स्य पालन से रची नई इबारत

प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर तिलैया पंचायत का कमालपुर गांव जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है।

यहां की जमीन उपजाऊ नहीं थी। इसी गांव की रहने वाली सुषमा देवी ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से न सिर्फ अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया, बल्कि एक साथ कई व्यवसाय शुरू कर प्रखंड क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है।

लंबे समय तक संघर्षों के बीच सुषमा देवी ने सबसे पहले अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने का काम शुरू किया। दिन-रात मेहनत कर उन्होंने जमीन को खेती योग्य बनाया।

इसी जमीन पर उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की और उसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करने लगीं। सब्जी की खेती से जब आमदनी होने लगी तो उनकी सोच में बदलाव आया।

सुषमा देवी ने पशुपालन की ओर कदम बढ़ाया और डेयरी का कार्य शुरू किया। डेयरी से हुई आय से उन्होंने अपने व्यवसाय को और विस्तार दिया।

इसके बाद उन्होंने पौधशाला (नर्सरी) लगाकर व्यवसाय शुरू किया। नर्सरी में विभिन्न प्रकार के फलदार और फूलदार पौधे तैयार कर वह बाजार में बेचने लगीं, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई।

इसी कड़ी में उन्होंने सबसे बड़ा और सराहनीय कदम उठाते हुए 200 फीट चौड़ा और 250 फीट लंबा तालाब की खुदाई कराई। इस तालाब में उन्होंने मछली पालन शुरू किया।

मछली पालन से वह आज अच्छी आमदनी कर रही हैं और पूरी तरह स्वावलंबी बन गई हैं। एक साथ सब्जी, डेयरी, नर्सरी और मत्स्य पालन जैसी विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार की जीवनशैली में बदलाव किया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

सुषमा देवी की विकास की यह कड़ी यहीं नहीं रुकती। जागरण से एक मुलाकात में उन्होंने बताया कि उनकी आगामी योजना और भी बड़ी और सराहनीय है।

शुरू करेंगी मछली पालन का काम

वह बताती हैं कि जल्द ही वह दूसरे किसानों से 10 एकड़ जमीन लीज पर लेकर और नए तालाबों का निर्माण कर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से मछली पालन का कार्य शुरू करेंगी।

उन्होंने तालाब के मेड़ पर पहले से ही फूलों की खेती लगा रखी है, जिससे अतिरिक्त आय हो रही है। सुषमा देवी ने बताया कि आने वाले समय में तालाब के ऊपर शेड का निर्माण कर कड़कनाथ मुर्गी पालन का कार्य भी शुरू किया जाएगा। कड़कनाथ मुर्गी की बाजार में काफी मांग है और इसकी कीमत भी अधिक मिलती है।

अब पालेंगी हरियाणवी भैंस

इसके अलावा डेयरी फार्म को और विस्तार देने के लिए हरियाणवी नस्ल की भैंस पालने की उनकी योजना है। हरियाणवी भैंस अधिक दूध देती है, जिससे डेयरी व्यवसाय को और मजबूती मिलेगी।

सुषमा देवी की यह कहानी बताती है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो जंगल-पहाड़ों के बीच बंजर जमीन पर भी हरियाली लाई जा सकती है और आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

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