
राजधानी के मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास शुक्रवार की अलसुबह पुलिस के साथ मुठभेड़ में तीन अपराधियों की मौत हो गई।
तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल लाए गए। इसकी सूचना मिलते ही मृतकों के स्वजन अस्पताल पहुंच गए और हंगामा करने लगे।
अस्पताल पहुंचे व्यक्ति को जमकर पीटा
इस क्रम में अस्पताल पहुंचे एक व्यक्ति को देखते ही मृतकों के स्वजन उसपर टूट पड़े। बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। वे उसपर मुखबिरी कर एनकाउंटर करवाने का आरोप लगा रहे थे। पुलिस ने मशक्कत कर उसे बचाया।
मृतकों की पहचान दानापुर थाना क्षेत्र के न्यू ताराचक निवासी जेपी यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के गंगहारा निवासी राजेश शर्मा और मनेर के सुअरमरवा निवासी बबलू कुमार के रूप में हुई है।
स्वजन शव देखने की मांग पर अड़ गए। वे एंबुलेंस तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी जमकर नोकझोंक हुई।
सूचना मिलने पर एसडीपीओ अजीत कुमार भी अस्पताल पहुंचे, लेकिन स्वजन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। हंगामे के कारण तीनों के शव काफी देर तक एंबुलेंस में ही पड़े रहे।

(घटना के बाद अस्पताल में विलाप करते पहुंचे मृतकों के स्वजन।)
20 मिनट तक चली मुठभेड़, थानेदार जख्मी
एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। अपराधियों ने पुलिस पर 24 राउंड फायरिंग की।
जवाब में पुलिस ने भी 18 राउंड गोलियां चलाईं। करीब 20 मिनट तक दोनों ओर से गोलीबारी होती रही। अपराधियों की गोली से मनेर थानेदार रजनीश कुमार भी जख्मी हो गए।
गोली उनकी बांह को छूते हुए निकल गई। मुठभेड़ के बाद तीनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एसएसपी ने बताया कि दुर्गाष्टमी के दिन मनेर में हुई एक हत्या के मामले में तीनों वांछित थे। तीनों का आपराधिक इतिहास भी रहा है।

स्वजन ने पुलिस के दावे पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, जेपी यादव के भाई रामाशीष यादव ने दावा किया कि पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड में तीनों का नाम नहीं था। वहीं, राजेश शर्मा के भाई ने बताया कि गुरुवार शाम को उनकी राजेश से बातचीत हुई थी।



