AI के कारण 500% तक बढ़े मेमोरी के दाम, जोहो फाउंडर बोले- कारोबार चलाना मुश्किल

एआई की बढ़ती मांग का असर अब कंप्यूटर मेमोरी की कीमतों पर भी दिखने लगा है. जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने बताया कि पिछले एक साल में मेमोरी की कीमतों में करीब 500% तक की बढ़ोतरी हुई है. उनका कहना है कि कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने से बचने की कोशिश की, लेकिन अब कीमतों को पहले के स्तर पर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि एआई के बढ़ते खर्च ने कारोबार के लिए चुनौती बढ़ा दी है.
मेमोरी की कीमतों में भारी उछाल
जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मेमोरी की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने टॉम्स हार्डवेयर की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 महीनों में मेमोरी की कीमतों में करीब 500% तक की बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 64जीबी DDR5-5600 किट की औसत कीमत अगस्त 2025 में करीब 191 डॉलर थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 1,118 डॉलर हो गई. यानी इसमें करीब 485% की बढ़ोतरी हुई. 128जीबी DDR5-6400 किट की कीमत भी 3,399 डॉलर तक पहुंच गई, जबकि इसकी सबसे कम दर्ज कीमत 329 डॉलर थी.
एआई बूम से बढ़ रहा कारोबार का खर्च
श्रीधर वेम्बू ने कहा कि मेमोरी की बढ़ती कीमतों के साथ एआई टोकन की कीमतों ने भी कारोबार चलाना मुश्किल बना दिया है. उनका कहना है कि कंपनियों ने अब तक बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचाने से बचने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च के बीच कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि एआई में बढ़ते निवेश ने बिजली उत्पादन, ट्रांसफॉर्मर, डीजल बैकअप जनरेटर, कूलिंग सिस्टम, मेमोरी, सीपीयू और जीपीयू जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है. उनके मुताबिक इसका असर स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
अब प्रोग्रामिंग में मेमोरी बचाना जरूरी
श्रीधर वेम्बू ने तकनीकी स्तर पर भी मेमोरी के बढ़ते खर्च को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रोग्रामिंग भाषाएं इस सोच के साथ बनाई गईं कि कंप्यूटर मेमोरी लगभग फ्री है, लेकिन अब वह दौर खत्म हो गया है. उनके मुताबिक, अब ज्यादा मेमोरी-कुशल प्रोग्रामिंग भाषाओं और बेहतर कंपाइलर की जरूरत है, ताकि एआई सिस्टम भी कम मेमोरी इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि कोड की सुरक्षा और उसे लिखने की उत्पादकता के लिए मेमोरी की अनावश्यक खपत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसे अपने शोध का क्षेत्र भी बताया.
एआई निवेश से बाजार पर दबाव
वेम्बू ने एआई निवेश में तेजी को स्मार्टफोन और लैपटॉप की बढ़ती कीमतों से भी जोड़ा. उनका कहना है कि महामारी के बाद बढ़े बड़े पैमाने के कर्ज ने एआई निवेश को बढ़ावा दिया है, जिससे कई बाजारों में असंतुलन पैदा हुआ है. उन्होंने इसकी तुलना 1995 से 2000 के बीच हुए टेलीकॉम निवेश उछाल से की. उनके मुताबिक, उस दौर में तकनीक वास्तविक थी और बाद में आम लोगों तक भी पहुंची, लेकिन इसके बावजूद 2001 से 2003 के बीच ज्यादातर टेलीकॉम उपकरण कंपनियां दिवालिया हो गईं. उनका कहना है कि तकनीक का वास्तविक होना बाजार में जोखिम खत्म होने की गारंटी नहीं देता.



