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फारस के राजा ने रोमन सम्राट को कैसे घुटनों पर झुकाया? ईरानियों ने ट्रंप को याद दिलाया इतिहास

 ईरान केवल हथियारों से ही नहीं, सोशल मीडिया के जरिए भी जंग लड़ रहा है.

कुछ समय पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान को पाषण युग में पहुंचा देंगे, इसके बाद ईरानियों ने ट्रंप को जवाब देने के लिए एक खास तरह की पोस्ट शेयर कीं.
पोस्ट उस घटना की याद दिलाती है कि जब रोमन सम्राट को फारस के सामने झुकना पड़ा था.
यह वही फारस है जिसे आज ईरान के नाम से जाना जाता है.
पोस्ट में दोनों राजाओं के सामने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घुटनों के बल बैठे नजर आ रहे हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता टूट गई या यूं कहिए कि दोनों ही देश किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे. 15 दिन का युद्धविराम लागू हुए चार-पांच दिन बीत चुके हैं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फिर से धमकी दी है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हर हाल में दुनिया के लिए खोल देंगे. इसके लिए जो कुछ भी करना होगा, उनकी सेना करेगी. करीब एक महीने से ज्यादा चले युद्ध, एक पखवारे के सीजफायर की घोषणा फिर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई दोनों देशों की शांति वार्ता के बेनतीजा होने के तुरंत बाद ट्रम्प की धमकी के बाद ईरान ने एक मीम का जरिए ट्रम्प को संदेश दिया है कि वह न तो झुका है और न ही झुकेगा. इस मीम में ट्रम्प को घोड़े पर सवार ईरान के राजा के सामने झुका हुआ दिखाया गया है.

मीम उस घटना को याद दिलाता है, जब रोमन सम्राट को फारस के राजा के सामने झुकना पड़ा था, क्योंकि वे युद्ध में हार गए थे. ताजे मसले के सामने आने के बाद इतिहास की उस घटना को याद करना जरूरी लगता है. आखिर क्या था वह मामला? कौन थे रोमन और फारस के राजा? यह कब की बात है? आइए, विस्तार से जानते हैं.

नाल्ड ट्रंप ने फिर से दी धमकी

अमेरिका-ईरान के संबंध काफी दिनों से खराब चल रहे हैं. इन दोनों देशों के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है. हाल में मामला तब अचानक फिर बिगड़ गया जब अमेरिका-इजरायल ने मिलकर बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया. यह युद्ध करीब सवा महीने चला. फिर शांति वार्ता भी तय हुई. दोनों देश आमने-सामने बैठे लेकिन बात कुछ बनी नहीं. तब अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर एक धमकी दे दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही. इनमें सांस्कृतिक विरासत वाली जगहें भी शामिल हैं. ट्रंप का यह बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया.

यह है वो सोशल मीडिया पोस्ट

 

मीम के जरिए ईरानियों ने किया पलटवार

ट्रंप की इस धमकी के जवाब में ईरानी पीछे नहीं हटे. उन्होंने बंदूक की जगह इतिहास का सहारा लिया. ईरान में सोशल मीडिया पर एक खास तस्वीर यानी मीम वायरल होने लगा. इस तस्वीर में एक प्राचीन ईरानी राजा और एक रोमन सम्राट नजर आ रहे हैं. मीम का संदेश साफ था है-ईरान ने पहले भी दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों को घुटने टेकने पर मजबूर किया है. असल में यह मीम केवल एक मजाक नहीं है. यह एक ऐतिहासिक घटना की याद दिला रहा है, जो लगभग 1700 साल पुरानी है. जब फारस यानी प्राचीन ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी ताकत, रोमन साम्राज्य को करारी शिकस्त दी थी.

राजा शापुर प्रथम और रोमन सम्राट वैलेरियन

यह कहानी तीसरी शताब्दी की है. उस समय दुनिया में दो बड़ी ताकतें थीं. एक तरफ शक्तिशाली रोमन साम्राज्य था. दूसरी तरफ फारस का ससानी साम्राज्य. ईरान पर उस समय राजा शापुर प्रथम का शासन था. वह एक बहुत ही कुशल योद्धा और शासक था. रोमन साम्राज्य और फारस के बीच लगातार युद्ध होते रहते थे. रोमन सम्राट वैलेरियन एक बड़ी सेना लेकर फारस पर हमला करने निकला. उसे अपनी जीत पर पूरा भरोसा था लेकिन शापुर प्रथम की रणनीति के आगे रोमन सेना टिक नहीं सकी.

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राजा शापुर प्रथम और रोमन सम्राट वैलेरियन. फोटो: AI Generated

एड्रेसा का युद्ध में हुई तगड़ी हार

सन 260 ईस्वी में एड्रेसा का युद्ध हुआ. इस युद्ध में रोमन सेना बुरी तरह हार गई. इतिहास में यह हार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार एक रोमन सम्राट को जिंदा पकड़ा गया था. ससानी राजा शापुर प्रथम ने रोमन सम्राट वैलेरियन को युद्ध के मैदान में बंदी बना लिया. रोमन इतिहास में यह सबसे बड़ी बेइज्जती मानी जाती है. वैलेरियन एकमात्र रोमन सम्राट था जिसे किसी दुश्मन देश ने युद्ध में बंदी बनाया था. यह घटना ससानी साम्राज्य की शक्ति का प्रतीक बन गई.

अपमान की कई कहानियां हैं प्रचलित

कहा जाता है कि शापुर प्रथम ने सम्राट वैलेरियन के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया. कुछ कहानियों के अनुसार, गिरफ़्तारी के बाद जब शापुर प्रथम को अपने घोड़े पर बैठना होता था, तो वह वैलेरियन की पीठ को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करता था. वैलेरियन को झुकना पड़ता था ताकि राजा उस पर पैर रखकर घोड़े पर चढ़ सके.

कहा जाता है कि इसी कैद के दौरान जब वैलेरियन की मौत हो गई, तो उसके शरीर में भूसा भर दिया गया. इसे फारस में एक ट्रॉफी की तरह रखा गया. यह सब इसलिए किया गया ताकि दुनिया को फारस की ताकत दिखाई जा सके. ईरान में प्रचलित ये कहानियाँ लोग अलग-अलग तरीके से सुनाते हैं. हालांकि, आधुनिक इतिहासकार इन कहानियों को सिर्फ अफवाह भी मानते हैं.

Iran Viral Post Decoded How Persia Captured Roman Emperor Meme On Donald Trump Recalls (1)

राजा शापुर प्रथम. फोटो: AI Generated

…लेकिन नक्श-ए-रुस्तम में दर्ज है गवाही

आज भी ईरान में नक्श-ए-रुस्तम नाम की एक जगह है. वहां पहाड़ों पर बड़े-बड़े चित्र उकेरे गए हैं. इनमें से एक चित्र बहुत प्रसिद्ध है. इस चित्र में राजा शापुर प्रथम घोड़े पर बैठा है. उसके सामने रोमन सम्राट वैलेरियन घुटनों के बल बैठा है और दया की भीख मांग रहा है. यह पत्थर पर उकेरा गया इतिहास है. यही वह तस्वीर है जो ट्रंप की धमकी के बाद ईरान में वायरल हुई. ईरानी लोग इसके जरिए कहना चाहते हैं कि वे किसी महान ताकत से नहीं डरते.

इतिहास कैसे राजनीति को प्रभावित करता है?

ईरान अपनी प्राचीन सभ्यता पर बहुत गर्व करता है. जब भी कोई बाहरी देश उन्हें धमकी देता है, वे अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हैं. ईरानी लोगों के लिए शापुर प्रथम और वैलेरियन का किस्सा उनकी वीरता का प्रतीक है. अमेरिका के लिए ट्रंप केवल एक राष्ट्रपति हैं लेकिन ईरानियों के लिए वे एक नए दौर के रोमन हमलावर की तरह हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैलेरियन की तस्वीर असल में एक चेतावनी ही है. इसका मतलब यह है कि जमीन बदल सकती है, हथियार बदल सकते हैं, लेकिन ईरान का जज्बा वही है जो शापुर प्रथम के समय था. तब रोमन दुनिया का ताकतवर देश था और आज अमेरिका है.

इस तरह कहा जा सकता है कि ईरान और अमेरिका का विवाद केवल आज के तेल या परमाणु हथियार तक सीमित नहीं है. इसमें हजारों सालों का इतिहास और सम्मान भी जुड़ा है. फारस ने जब एक रोमन सम्राट को बंदी बनाया था, तो उसने दुनिया को संदेश दिया था. सदियों बाद ट्रंप के समय वही संदेश फिर से गूंज रहा है. इतिहास एक बार फिर करवट लेकर दुनिया के सामने है. इंटरनेट पर मीम बनकर जिंदा है. यह हमें याद दिलाता है कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से भी लड़े जाते हैं. इतिहास की एक फोटो भी दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति को उसकी सीमा याद दिला रही है. ईरान का यह इतिहास आज भी वहां के बच्चों को पढ़ाया जाता है. जब तक नक्श-ए-रुस्तम के वे पत्थर मौजूद हैं, ईरान इसी तरह दुनिया को अपनी पुरानी ताकत की याद दिलाता रहेगा.

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