
सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम में जिले का पहला आधुनिक विद्युत व लकड़ी शवदाह गृह अगले माह तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
शनिवार को जिलाधिकारी कुमार गौरव और नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से निर्माण स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस परियोजना के चालू होने से स्थानीय लोगों को अंतिम संस्कार में बड़ी सहूलियत मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
परियोजना का स्थलीय निरीक्षण
सात निश्चय दो योजना के तहत 9.65 करोड़ रुपये की लागत से दो सेट विद्युत और चार सेट उन्नत लकड़ी शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन शेड, मशीनरी और अन्य घटकों का बारीकी से जायजा लिया।
मौके पर मौजूद बुडको के कार्यपालक अभियंता नारायण दुबे को कार्य की गुणवत्ता बनाए रखते हुए शेष काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
अक्टूबर तक फिनिशिंग पूरी
अधिकारियों ने पाया कि परियोजना का सिविल निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और वर्तमान में फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में है।
जिलाधिकारी ने कार्यदायी एजेंसी को अक्टूबर माह तक हर हाल में सभी तकनीकी व निर्माण कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इसके शुरू होने से नदी किनारे प्रदूषण पर रोक लगेगी और दाह संस्कार की प्रक्रिया आसान होगी।
पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण
पारंपरिक दाह संस्कार में प्रति शव करीब 300 से 400 किलोग्राम लकड़ी की खपत होती है, जबकि यह आधुनिक तकनीक हर साल हजारों पेड़ों को कटने से बचाएगी।
खुले में शव जलाने से उठने वाले भारी धुएं, कार्बन उत्सर्जन और राख के सीधे नदियों में प्रवाह पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
इससे आसपास के रहवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और नदी का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहेगा।
किफायती और समय की बचत
बाजार में लकड़ी और पूजन सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण दाह संस्कार पर पांच से दस हजार रुपये या उससे अधिक खर्च हो जाते हैं।
विद्युत शवदाह गृह में बेहद मामूली सरकारी शुल्क पर यह प्रक्रिया संपन्न हो सकेगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इसके अलावा पारंपरिक चिता में लगने वाले तीन से पांच घंटे के मुकाबले यहां 60 से 90 मिनट में अंतिम संस्कार पूरा हो जाएगा।
आधुनिक सुविधाएं और परंपरा
शेडयुक्त परिसर होने के कारण बारिश या आंधी के मौसम में भी अंतिम संस्कार बिना किसी व्यवधान के सुचारू रूप से संचालित रहेगा।
परिसर में शोक संतप्त परिजनों के लिए वेटिंग हॉल, शुद्ध पेयजल, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और स्नानघर जैसी गरिमापूर्ण नागरिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
वहीं धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए उन्नत चिमनी आधारित लकड़ी शवदाह गृह का भी अलग से विकल्प उपलब्ध रहेगा।



