
आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं के लगातार विरोध प्रदर्शन का परिणाम बताया।
मीडिया को संबोधित करते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके संघर्ष ने आखिरकार सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि इस्तीफा लोकतांत्रिक आंदोलनों की ताकत को दर्शाता है और दिखाता है कि सरकारों को अंततः जनता की मांगों का जवाब देना चाहिए।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर हुआ है क्योंकि सरकारें नागरिकों की चिंताओं के प्रति अनुत्तरदायी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ताजा घटनाक्रम से यह याद दिलाना चाहिए कि चुनी हुई सरकारें लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करेगा, उन्होंने कहा कि भविष्य में पेपर लीक को रोकने के लिए उपाय किए जाने चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्र अत्यधिक संकट में न पड़ें।
भाजपा नीत केंद्र सरकार पर व्यापक हमला करते हुए आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने दावा किया कि पिछले 12 साल में इस्तीफा केवल दूसरी बार हुआ है जब नरेंद्र मोदी सरकार को जन आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कई अधिकारियों को हटाए जाने की खबर का भी स्वागत किया और इसे छात्रों के लिए एक बड़ी जीत बताया। राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके सहित कार्यकर्ताओं ने देश भर के हजारों छात्रों के साथ पिछले कई हफ्तों से आंदोलन को जीवित रखा है।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि सरकार ने शुरू में प्रदर्शनों का जवाब पुलिस कार्रवाई से दिया था, लेकिन अंततः जनता के दबाव के कारण उसे कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सिसोदिया ने कहा कि इस आंदोलन को भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों और परीक्षा में कदाचार के खिलाफ लड़ाई की नींव बनना चाहिए।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने इस्तीफे को छात्रों, युवाओं और लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बावजूद, केंद्र ने आंदोलन के पूरे देश में विस्तार होने तक बातचीत करने से इनकार कर दिया।
आप की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस इस्तीफे ने इस धारणा को तोड़ दिया है कि भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री राजनीतिक रूप से अछूत हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्र विरोधी करार दिए जाने और विभिन्न आरोपों का सामना करने के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र एकजुट रहे और अंतत: सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर करने में सफल रहे।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने भी छात्र समुदाय को बधाई देते हुए कहा कि यह इस्तीफा लोकतांत्रिक तरीकों से सरकारों को जवाबदेह ठहराने की युवाओं की शक्ति को दर्शाता है।
एमसीडी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग और कोंडली विधायक कुलदीप कुमार सहित आप के अन्य नेताओं ने भी छात्र आंदोलन की प्रशंसा की।
एनएसयूआई ने निकाला विजय मार्च
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने शनिवार को अपने राष्ट्रीय मुख्यालय से जंतर-मंतर तक विजय मार्च का आयोजन किया।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में यह मार्च छात्र संगठन की बड़ी जीत के जश्न में आयोजित किया गया था। हालांकि, संगठन ने यह स्पष्ट किया कि वह अपना अभियान तब तक जारी रखेगा जब तक कि उसकी शेष मांगों को पूरा नहीं किया जाता।
सभा को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा कि इस्तीफा छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन का परिणाम है और इस बात पर जोर दिया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘जो सरकार एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं थी, उसे इस देश के छात्रों ने घुटनों पर ला दिया है। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक हर छात्र को न्याय नहीं मिल जाता।



