आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी की बिक्री मार्च 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है, जो आरबीआई की मंजूरी के अधीन है

निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने बुधवार को कहा कि आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री लेनदेन को चालू वित्त वर्ष (31 मार्च, 2027) के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंजूरी पर निर्भर करता है।

चावला ने कहा कि विजेता बोलीदाता फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स आरबीआई को अपने तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और अतिरिक्त अनुपालन और नियामकीय दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक जानकारी सहित अपनी पात्रता प्रस्तुत करेगी।

उन्होंने कहा कि नियामकीय मंजूरी के बाद शेयर खरीद समझौते को क्रियान्वित किया जाएगा, जिससे चालू वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले लेनदेन को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।

उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि लेन-देन के दौरान अल्पांश और खुदरा शेयरधारकों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी।

एक बार शेयर खरीद समझौता निष्पादित हो जाने के बाद, रणनीतिक खरीदार को अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए एक खुली पेशकश का विस्तार करना चाहिए, जिससे उन्हें प्रासंगिक वैध नियमों के अनुसार अपने शेयरों को निविदा देने की अनुमति मिलती है।

चावला ने कहा कि बाजार नियामक ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को निर्देश दिया है कि वह विनिवेश के बाद आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी 19 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करे।

इस कमी से बैंक के सार्वजनिक फ्लोट में अतिरिक्त 4 प्रतिशत अंक की वृद्धि होगी, जिससे खुदरा निवेशकों और अन्य सार्वजनिक हितधारकों को अधिक शेयर उपलब्ध होंगे।

सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को करीब 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) में बेचने को मंजूरी दे दी।

चावला ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आईडीबीआई बैंक का पुनर्गठन अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक लेनदेन है और इससे सबसे अधिक एफडीआई प्राप्त होगा।

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