प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत में नया मोड़, अब परिजनों ने कर दिया ये बड़ा दावा

वृंदावन स्थित प्रसिद्ध राधा केली कुंज आश्रम से जुड़ी संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के मामले ने अब एक नया और तूल पकड़ता मोड़ ले लिया है. प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई है. रसिक दुलाई मध्यप्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं. उनका नाम दीपक लोधी था. इस घटना की जानकारी मिलते ही जबलपुर से वृंदावन पहुंचे मृतक के परिजनों ने आश्रम प्रबंधन पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं.

परिजनों का सीधा दावा है कि जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली थी. आश्रम वाले उन्हें परिवार से मिलने तक नहीं देते थे. घंटों और दिनों तक चक्कर काटने के बावजूद उन्हें दूर रखा जाता था. यही नहीं हादसे के बाद जब गमगीन परिवार वृंदावन पहुंचा तो आश्रम का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति उनकी सुध लेने या सांत्वना देने तक नहीं आया.

घर वालों ने किया ये दावा

वृंदावन पहुंचे मृतक साधक के एक परिजन ने बातचीत के दौरान आश्रम व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. परिजनों के मुताबिक, दीपक साल 2024 से आश्रम में रह रहा था. लेकिन जब से उसने गुरु दीक्षा ली थी, आश्रम के लोग किसी भी रिश्तेदार या घरवाले को उससे मिलने नहीं देते थे.

परिवार जब भी मिलने आता था तो उन्हें ‘एक-दो घंटे रुको’ कहकर टाल दिया जाता था या वापस भेज दिया जाता था. परिजन तीन-तीन दिन तक मिलने के लिए चक्कर काटते रहते थे. लेकिन मुलाकात नहीं कराई जाती थी.

रात के 3 बजे पहुंचे फिर भी नहीं दी गई कोई जानकारी

घटना के बाद परिजनों के साथ आश्रम में हुए बर्ताव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. परिजनों को फोन पर सूचना दी गई थी कि उनका बेटा गिर गया है और अस्पताल में ऑपरेशन होना है. खबर मिलते ही परिजन जबलपुर से तुरंत निकले और रात 3 बजे प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे. आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने उन्हें कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया और सुबह 8 बजे तक बाहर बैठने को कह दिया.

हत्या या हादसे की आशंका

जब परिजनों से शरीर पर मिली गंभीर चोट और प्राइवेट पार्ट में चोट की बात सामने आने के बाद सवाल किया गया तो उन्हें इस घटना को आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया. परिजनों का कहना है कि दीपक परिवार का सबसे सुलझा और सही लड़का था. उसने कभी भी ऐसी कोई बात नहीं की जिससे लगे कि वह डिप्रेशन में है या सुसाइड जैसा कदम उठा सकता है. पुलिस फिलहाल हत्या और खुदकुशी दोनों ही एंगल से मामले की गहन तफ्तीश कर रही है.

दुख की घड़ी में आश्रम से कोई नहीं आया

परिजनों ने भारी मन से इस बात पर भी दुख जताया कि इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद भी प्रेमानंद महाराज के आश्रम की तरफ से कोई भी व्यक्ति उनकी सुध लेने अस्पताल या पोस्टमॉर्टम हाउस नहीं पहुंचा. परिजनों का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद कम से कम आश्रम के किसी प्रतिनिधि को संवेदना व्यक्त करने या मदद के लिए उनके पास आना चाहिए था. लेकिन पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ दिया गया.

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