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लाल कम, भगवा ज्यादा! अखिलेश के PDA रथ पर मायावती का तंज, सपा की रणनीति पर उठाए सवाल

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ को लेकर निशाना साधा है. मायावती ने रथ के रंग को लेकर सवाल उठाते हुए इसे सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस और बीजेपी के भगवा रंग से ज्यादा जुड़ा बताया. उन्होंने सपा की चुनावी रणनीति और ‘PDA’ की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए. अखिलेश यादव 24 सितंबर को इसी PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं और रायबरेली में हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी के आवास पर पहुंचेंगे.

PDA रथ से रायबरेली जाएंगे अखिलेश

समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच PDA रथ तैयार किया है. अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली जाएंगे. कार्यक्रम के मुताबिक वह रायबरेली में हरचंदपुर से विधायक राहुल लोधी के आवास पर पहुंचेंगे. इसके लिए पार्टी ने विशेष रूप से तैयार मल्टी-एक्सल बस का इंतजाम किया है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं. अखिलेश लखनऊ से रायबरेली सीमा तक कार से जाने के बाद चुरुआ से PDA रथ पर सवार होकर रायबरेली शहर पहुंचेंगे.

 

मायावती बोलीं- लाल से ज्यादा भगवा नजर आ रहा

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए सपा प्रमुख का प्रचारित ‘PDA रथ’ सपा के अपने लाल रंग से कम और आरएसएस-बीजेपी के ‘भगवा’ रंग का यानी भगवाकरण ज्यादा दिखाई दे रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह वोटों के स्वार्थ में लगातार रंग बदलने की रणनीति है या फिर सपा प्रमुख का मुसलमानों से वोट पाने का भरोसा कम हो गया है.

मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश के खासकर मुस्लिम समाज को इस बात का अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद पार्टी यूपी और केंद्र की सत्ता में बीजेपी को सरकार बनाने से नहीं रोक पाई. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “ऐसे में इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट खराब क्यों किया जाए?” मायावती ने दावा किया कि इसी वजह से मुस्लिम समाज में सपा के प्रति रुख बदलने की चर्चा है और उन्होंने इसकी तुलना अपरकास्ट में खासकर ब्राह्मण समाज के बीच बीएसपी की ओर बदलते रुख से की. यह मायावती का राजनीतिक दावा है.

बीएसपी की जरूरत का भी किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में बीएसपी के शासन और उसकी नीतियों को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के साथ जनहित, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में कई बार अपना शासन स्थापित किया है. मायावती ने बीएसपी को ‘आयरनलेडी राज’ के तौर पर पेश करते हुए कहा कि सर्वसमाज के हित और कल्याण के लिए प्रदेश को इसकी जरूरत है. उन्होंने बीएसपी की नीतियों को कानून के राज और व्यापक जनहित से जोड़कर बताया.

PDA की राजनीति पर सवाल

मायावती ने सपा के ‘PDA’ की परिभाषा को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि चुनावी स्वार्थ के अनुसार सपा ने कभी ‘PD’ को ‘पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ‘पंडित’ बताया. मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि खुद को अंबेडकरवादी दिखाने के लिए अखिलेश यादव ने बीएसपी के नीले रंग वाले कपड़े पहनकर तस्वीरें खिंचवाईं, लेकिन लोगों ने इसे ‘फेक अंबेडकरवादी’ कहकर खारिज कर दिया. यह भी मायावती द्वारा सपा पर लगाया गया राजनीतिक आरोप है.

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का किया दावा

मायावती ने कहा कि इसके विपरीत बीएसपी ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति और सिद्धांत पर चलने वाली अंबेडकरवादी पार्टी है. उन्होंने कहा कि पार्टी सभी लोगों को रोटी, रोजगार, आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का पक्षधर मानती है. मायावती के मुताबिक इसी वजह से सर्वसमाज में बीएसपी का अपना सम्मान है. वहीं, अखिलेश यादव के PDA रथ अभियान की शुरुआत 24 सितंबर को रायबरेली से होनी है, ऐसे में मायावती की यह टिप्पणी यूपी की 2027 चुनावी तैयारियों के बीच सपा की रणनीति पर सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर सामने आई है.

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