सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से पत्रकार को बचाने के अपने आदेश को ‘पूर्ण’ बनाया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अयोध्या राम मंदिर के दान की ‘चोरी’ की खबर देने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को गाजियाबाद पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज रोड रेज मामले में दंडात्मक कार्रवाई से बचाने का अंतरिम आदेश दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) को 22 अगस्त को जारी नोटिस को रद्द कर दिया, जिसमें उपाध्याय के बारे में कुछ जानकारी और डिजिटल विवरण मांगे गए थे।

पीठ ने उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्राथमिकी को चुनौती देने की छूट दी। अदालत ने उन्हें मामलों में जांच के दौरान पुलिस द्वारा व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश निर्धारित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी स्वतंत्रता दी।

यह आदेश तब आया जब वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने उपाध्याय की ओर से कहा कि हालांकि प्राथमिकी अगस्त में दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस ने 1 जून से ‘एक्स’ से जानकारी मांगी थी।

पीठ ने कहा, ”आपने (पुलिस ने) उन्हें (‘एक्स’) तीन महीने पहले के आंकड़े मुहैया कराने के लिए नोटिस दिया है। पीठ ने उत्तर प्रदेश के वकील से कहा कि कथित अपराध से पहले की अवधि के लिए पत्रकार का कोई गोपनीय या व्यक्तिगत डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को उपाध्याय को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण दिया था।

उपाध्याय ने कथित रोड रेज की घटना के सिलसिले में गाजियाबाद पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

यूट्यूब चैनल चलाने वाले उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पुलिस की एक टीम 20 अगस्त की देर रात उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बताया कि रोड रेज और अपमानजनक व्यवहार के आरोपों के बाद इंदिरापुरम पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिकी उनके खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है और यह उनके स्वतंत्र पत्रकारिता कार्यों के लिए उन्हें परेशान करने का प्रयास है।

पत्रकार ने दलील दी कि प्राथमिकी की प्रति उन्हें नहीं दी गई थी और पुलिस आसपास के दुकानदारों को संबंधित समय के सीसीटीवी दृश्यों को हटाने के लिए मजबूर कर रही थी। उन्होंने एफआईआर को रद्द करने या वैकल्पिक रूप से इसकी जांच को उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित करने की मांग की है.

उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद में कथित रोड रेज की घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार पर उनकी रिपोर्टिंग के संबंध में यह मामला दर्ज किया गया था।

यह कथित घटना 18 अगस्त को गाजियाबाद के शिप्रा मॉल के पास हुई, जब एक मोटरसाइकिल सवार ने कथित तौर पर उनकी कार को छुआ। उन्होंने बताया कि व्यक्ति ने बाद में पुलिस की आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर फोन किया और बाद में प्राथमिकी दर्ज की गई।

उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पुलिस टीम संभवत: उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके आवास पर आई थी और उन्होंने गाजियाबाद पुलिस से कथित घटना का सीसीटीवी फुटेज जारी करने का अनुरोध किया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने पहले राम मंदिर, अयोध्या में दान देने में कथित अनियमितताओं और उत्तर प्रदेश सरकार में कथित भ्रष्टाचार के बारे में रिपोर्ट दी थी।

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