
हरियाणा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने और उनके कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची में किए गए सभी चुनावों और परिवर्तनों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग करते हुए शुक्रवार को चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। इस मौके पर हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त भी मौजूद थे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, मौजूदा सांसद दीपेंद्र हुड्डा, जय प्रकाश, वरुण मुलाना और सतपाल भ्रमाचारी, पूर्व सांसद अशोक तंवर और बृजेंद्र सिंह के अलावा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और बाद में प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि चुनाव आयोग में दर्ज आपत्तियों और मतदाता सूचियों से नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित फैसलों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा की भी मांग की।
संजय दत्त ने कहा कि मतदाता का मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण ताकत है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित हर फैसले में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है और कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाना जारी रखेगी।
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक प्रणाली की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के संबंध में उठाए जा रहे सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा की जानी चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकार सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान लिए गए चुनाव संबंधी सभी प्रमुख फैसले, मतदाता सूची में किए गए बदलाव और एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के संबंध में उत्पन्न होने वाले हर प्रश्न का समाधान तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए ताकि जनता का विश्वास बरकरार रहे।



