
बिहार के मधुबनी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बलिराजगढ़ गांव में ड्यूटी पर तैनात एक ASI ने फायरिंग कर दी। इस घटना में एक सख्श की मौत हो गई, बल्कि कई ग्रामीण घायल हैं।
इस मामले में पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। घटना के बाद फरार आरोपी एएसआई चंद्रमोहन सिंह को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही आज ही उसे सेवा से बर्खास्त भी कर दिया जाएगा।
इनाम घोषित, स्पीडी ट्रायल होगा
एसएसपी योगेन्द्र कुमार ने बताया कि आरोपी एएसआई की गिरफ्तारी के लिए पांच सदस्यों वाली विशेष टीम का गठन किया गया है। चंद्रमोहन सिंह के बारे में सूचना देने वाले को मधुबनी पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।
एसएसपी का कहना है बाबूबरही थाना में एएसआई चंद्रमोहन सिंह पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर स्पीडी ट्रायल चलाकर फांसी दिलाने की कोशिश की जाएगी। किसी तरह के अपवाह पर ध्यान नहीं देने की भी अपील एसएसपी ने की है।
पहले भी चला चुका है गोलियां
चंद्रमोहन सिंह इससे पूर्व मधवापुर थाना में डायल-112 की टीम में प्रतिनियुक्त था। वहां 12 जुलाई 2025 को शराब तस्करी के संदेह में बाइक सवार दो युवकों का पीछा करने के दौरान पिरोखर एनएच पर पुल के समीप डायल-112 वाहन से बाइक में ठोकर लग गई थी। हादसे में एक नाबालिग बाइक सवार की मौत हो गई थी।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर पथराव किया था। घटना के समय डायल-112 वाहन में एएसआई चंद्रमोहन सिंह और चालक चंद्रदीप शास्त्री मौजूद थे। लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस की ओर से चार से पांच राउंड गोली चलाए जाने की भी बात सामने आई थी।
सूचना मिलते ही वरीय पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एसएसपी योगेंद्र कुमार ने एएसआई चंद्रमोहन सिंह और चालक चंद्रदीप शास्त्री को निलंबित कर दिया था।
इस घटना को लेकर मधवापुर थाने में तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मृतक नाबालिग के पिता ने एएसआई चंद्रमोहन सिंह और डायल-112 के चालक चंद्रदीप शास्त्री पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
वहीं, दो अन्य प्राथमिकी पुलिस पदाधिकारियों की ओर से दर्ज कराई गई थीं। इनमें एक बाइक सवार युवकों के पास से बरामद शराब से संबंधित थी, जबकि दूसरी पुलिस पर पथराव और मारपीट की घटना को लेकर दर्ज की गई थी।
गांव की सुरक्षा के लिए लगी थी ड्यूटी
मई 2026 में बलिराजगढ़ खुदाई स्थल पर उपद्रवी लोगों द्वारा काम को प्रभावित किया जा रहा था और खुदाई में मिले पुरातत्विक अवशेष को चुराया जा रहा था। तब वहां एसएसपी और ग्रामीणों ने बैठक पुलिस कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया था।
उसके बाद से ही यहां एक एएसआई, तीन सेफ के जवान और दो चौकीदार तैनात थे। ड्यूटी के बाद वे आवासीय बालिका विद्यालय में रहते थे। बलिराजगढ़ में सुरक्षा के लिए ही पुलिस पीकेट बनाई गई है। वहीं पर इसको तैनात किया गया था।



