मुख्यमंत्री कार्यालय, पंजाब
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाने के लिए औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति–2026 की शुरुआत
– पंजाब ने देश की सबसे प्रगतिशील औद्योगिक नीति की शुरुआत की, निवेशक अपने व्यापार मॉडल के अनुसार रियायतों का लाभ ले सकेंगे : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पंजाब में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है, विकास की गति तेज करने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के लिए औद्योगिक नीति–2026 लाई गई : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– निवेशक 20 रियायतों का चयन कर अपने व्यवसाय मॉडल के अनुसार पैकेज तैयार कर सकते हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– पंजाब में पहली बार पूंजी सब्सिडी की पेशकश; स्थिर पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्राप्त करने की सुविधा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता घटाकर 25 करोड़ रुपये के निवेश और 50 श्रमिकों तक की गई: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
– छोटे उद्योगों को समर्थन देने के लिए रोज़गार सृजन सब्सिडी पात्रता घटा कर 25 करोड़ रुपए के निवेश और 50 श्रमिकों तक की: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
लुधियाना, 7 मार्च 2026:
पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान ने आज लुधियाना में ऐतिहासिक औद्योगिक और व्यापार विकास नीति–2026 की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार क्रांतिकारी सुधारों और उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए प्रोत्साहन ढांचे के माध्यम से पंजाब को देश का नंबर एक निवेश गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने औद्योगिक विकास को तेज करने, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और पूरे राज्य में रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों के साथ नई औद्योगिक नीति तैयार की है।
यह बताते हुए कि पंजाब में पहले ही रिकॉर्ड स्तर का निवेश हो रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति निवेशकों को 20 तक प्रोत्साहनों का चयन करने और अपने व्यवसाय मॉडल के अनुरूप अनुकूलित पैकेज तैयार करने की अनुमति देती है। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत पंजाब में पहली बार पूंजी सब्सिडी की पेशकश की गई है। इसके अलावा यह स्थिर पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्रदान करती है और रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता को 25 करोड़ रुपये के निवेश और 50 कर्मचारियों तक घटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार यह नीति औद्योगिक प्रोत्साहनों के माध्यम से व्यवसायों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलते हुए विनिर्माण, सेवाओं और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में पंजाब की स्थिति को एक अग्रणी केंद्र के रूप में मजबूत करती है।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह नीति पंजाब में औद्योगिक प्रोत्साहन ढांचे में एक बड़े परिवर्तन का संकेत देती है। उन्होंने कहा कि भारत के अधिकांश राज्यों में निवेशकों को एक निश्चित प्रोत्साहन सूची दी जाती है, जिसमें केवल उसे स्वीकार करने या छोड़ने का विकल्प होता है, लेकिन पंजाब ने इस परंपरा को बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत अब एक निवेशक 20 तक प्रोत्साहनों का चयन कर सकता है और अपने व्यवसाय मॉडल के अनुरूप एक पैकेज तैयार कर सकता है।
इस दृष्टिकोण के पीछे का तर्क स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न उद्योगों की संचालन प्रक्रियाएं और लागत संरचनाएं अलग-अलग होती हैं। उदाहरण के लिए, फार्मास्यूटिकल कंपनियों को एक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता से अलग प्रकार के समर्थन की आवश्यकता होती है, जबकि एक डेटा सेंटर की लागत संरचना एक टेक्सटाइल प्लांट से अलग होती है। उन्होंने कहा कि पंजाब की नई नीति इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रोत्साहन प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि यह ढांचा निवेशकों को उनके क्षेत्र, लागत संरचना और संचालन के पैमाने के अनुसार उपयुक्त प्रोत्साहनों का चयन करने की अनुमति देता है, जिससे वे अपने पैकेज को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुविधा नयी नीति के अंतर्गत प्रदान की गई है, जो पहले नहीं थी।
नीति की एक और महत्वपूर्ण विशेषता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार सरकार ने पूंजी सब्सिडी की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि यदि कोई उद्योग 100 करोड़ रुपये के संयंत्र की योजना बना रहा है तो पूंजी सब्सिडी के बिना यह पूरी राशि निवेशक के जोखिम पर होती है। लेकिन पूंजी सब्सिडी के माध्यम से सरकार स्वयं निवेश का एक हिस्सा वहन करती है, जिससे निवेशक का जोखिम कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इससे निवेश की आर्थिक व्यवहार्यता में काफी सुधार होता है। “इसका मतलब है कि कम निवेश के साथ भी वही राजस्व संभव हो सकता है। पंजाब देश का पहला राज्य है जिसने इस प्रकार की सुविधा प्रदान की है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों में अधिकांश औद्योगिक नीतियां मुख्य रूप से नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बनाई जाती हैं, जबकि पहले से काम कर रहे उद्योगों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में नीतियां अक्सर बाहरी निवेशकों, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं और नई कंपनियों को आकर्षित करने पर केंद्रित होती हैं, जबकि पहले से कार्यरत उद्योगों को बाद में प्राथमिकता दी जाती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की नई नीति इस असंतुलन को दूर करती है, क्योंकि इसमें आधुनिकीकरण और विस्तार परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन के लिए पात्र बनाया गया है। अब यदि लुधियाना का कोई निर्माता अपनी मशीनरी को अपग्रेड करना चाहता है, उत्पादन लाइन बढ़ाना चाहता है या क्षमता का विस्तार करना चाहता है, तो उसे भी नए निवेशकों की तरह नीति का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यह नीति निवेशकों को प्रोत्साहनों की अवधि बढ़ाने का विकल्प देकर दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करती है। इसके तहत प्रोत्साहन अवधि को 15 वर्षों तक बढ़ाया गया है, जबकि अधिकांश राज्यों में यह अवधि केवल 5 से 10 वर्ष होती है।
उन्होंने कहा कि यह प्रावधान विशेष रूप से पूंजी-गहन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। “भारी उद्योग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल, डेटा सेंटर और अन्य क्षेत्रों के लिए यह बहुत लाभकारी है, क्योंकि इन उद्योगों को लाभ में आने में कई वर्ष लगते हैं।”
उन्होंने कहा कि 15 वर्षों की अवधि भविष्य के सभी प्रोत्साहनों के कुल वर्तमान मूल्य और शुद्ध वर्तमान मूल्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है, जो पूंजी-गहन क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि स्थिर पूंजी निवेश की परिभाषा का विस्तार किया गया है, जिससे उस आधार को बढ़ाया गया है जिस पर प्रोत्साहनों की गणना की जाती है। अब इसमें भूमि, श्रमिक आवास, अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम भी शामिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि पर्यावरणीय मानकों और नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को भी वित्तीय रूप से समर्थन मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति छोटे उद्योगों के लिए औद्योगिक प्रोत्साहनों को अधिक सुलभ बनाने पर भी केंद्रित है। इसके तहत रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता को घटाकर 25 करोड़ रुपये के निवेश और 50 वर्करों तक कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पहले निर्धारित सीमाएं इतनी अधिक थीं कि कई छोटे और मध्यम उद्योग इस योजना के दायरे से बाहर रह जाते थे।
पंजाब की अर्थव्यवस्था में छोटे उद्योगों की भूमिका पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के औद्योगिक ढांचे की रीढ़ केवल बड़े कारखाने नहीं हैं। लुधियाना, जालंधर, बटाला और गोबिंदगढ़ में हजारों छोटे निर्माता हैं, जो 30, 40 या 50 लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योगों को इस ढांचे के अंतर्गत लाकर सरकार वास्तव में उन व्यवसायों में निवेश कर रही है, जो अपने निवेश के हर रुपये के बदले अधिकतम रोजगार सृजित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति समावेशी रोजगार को भी बढ़ावा देती है। उन्होंने बताया कि महिलाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने वाले उद्योगों तथा आईटी/आईटीईएस और जीसीसी इकाइयों के लिए उच्च रोजगार सृजन सब्सिडी दरें सुनिश्चित की गई हैं, ताकि सामाजिक समावेशन के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि यह वैश्विक निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप है। “ईएसजी प्रतिबद्धताओं वाली कंपनियों और विविधता मानकों को ध्यान में रखने वाले वैश्विक निवेशकों के लिए यह एक ऐसी नीतिगत विशेषता है, जो वर्ष 2026 में बोर्डरूम की प्राथमिकताओं से सीधे तौर पर जुड़ती है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने उन क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए हैं, जहां अधिक निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और सीमा तथा सीमावर्ती इलाकों में स्थित उद्योगों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों में ऐतिहासिक रूप से निवेश का स्तर कम रहा है। “इन जिलों में भौगोलिक जोखिम के कारण निवेश अपेक्षाकृत कम रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए पंजाब अब निवेशकों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनके जोखिम की भरपाई वित्तीय रूप से कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में अपना उद्यम स्थापित करने के इच्छुक स्टार्टअप उद्यमियों के लिए यह प्रोत्साहन ढांचा वास्तव में प्रभावी व्यवस्था साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब कई प्रमुख क्षेत्रों के लिए समर्पित नीतिगत ढांचे तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा, “आईटी/आईटीईएस, जीसीसी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ईएसडीएम, सेमीकंडक्टर, फिल्म निर्माण, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों के लिए अलग-अलग समर्पित नीतियां बनाई गई हैं।”
उन्होंने बताया कि इन नीतियों को व्यापक औद्योगिक परामर्श के बाद तैयार किया गया है। यह केवल एक साधारण व्यवस्था नहीं है, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र के विशेषज्ञों की अध्यक्षता वाली उद्योग समिति द्वारा तैयार किया गया एक स्वतंत्र ढांचा है। इसका अर्थ है कि सरकार ने उद्योग जगत से सलाह लेकर उनके लागत ढांचे के अनुरूप प्रोत्साहन तैयार किए हैं।
पंजाब में निवेश की बढ़ती गति को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 से अब तक पंजाब को 1.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है, जिसमें से 55,000 करोड़ रुपये का निवेश पिछले वर्ष ही आया है।
उन्होंने कहा, “टाटा, इंफोसिस, वर्धमान, ट्राइडेंट, एचएमईएल और फोर्टिस जैसी कंपनियों ने एक वर्ष की समय-सीमा के भीतर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस नीति के तहत निवेशक भूमि, मशीनरी, भवन, अनुसंधान एवं विकास और ईटीपी सहित अपने स्थायी पूंजी निवेश का 100 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं। यह नीति इस प्रकार तैयार की गई है कि इससे पंजाब सरकार की प्रगति और राज्य के अनुकूल व्यावसायिक वातावरण में निवेशकों का विश्वास तेजी से बढ़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति लगभग 200 प्रमुख उद्योगपतियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में लॉन्च की गई, जो पंजाब के औद्योगिक विकास में उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और विश्वास का प्रमाण है।
उन्होंने इस पहल को देश के सबसे प्रगतिशील औद्योगिक नीति ढांचों में से एक बताते हुए कहा कि यह नीति विनिर्माण, सेवा और उभरते तकनीकी क्षेत्रों के लिए पंजाब की स्थिति को और मजबूत करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति स्टार्टअप्स के लिए भी सकारात्मक माहौल तैयार करती है, जिसमें स्टार्टअप सीड ग्रांट में वृद्धि और मोहाली में सरकारी स्टार्टअप हब की स्थापना शामिल है।
उन्होंने बताया कि पंजाब से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए फ्रेट और मार्केटिंग सब्सिडी सहायता शुरू की गई है और मेगा निवेश परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए कस्टमाइज्ड पैकेज कमेटी का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए बिजली आपूर्ति, श्रम नियमों और भवन स्वीकृति प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।
उन्होंने कहा, “यह नीति भारत और दुनिया भर के निवेशकों को स्पष्ट संदेश देती है कि पंजाब व्यवसाय के लिए पूरी तरह खुला है। देश के सबसे व्यापक प्रोत्साहन ढांचे के साथ पंजाब उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति निवेशकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “पहली बार ऐसी नीति लाई गई है, जिसमें वास्तव में शक्ति निवेशकों के हाथों में दी गई है। निवेशक स्वयं यह चुन सकते हैं कि वे कौन-से प्रोत्साहन लेना चाहते हैं और किस समय सीमा में उनका लाभ उठाना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा, “यह स्वतंत्रता और निवेशक-केंद्रित ढांचा अभूतपूर्व है और भारत में सबसे अधिक निवेशक-अनुकूल राज्य बनने के लिए पंजाब की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
इस पहल के पीछे की दूरदर्शिता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक और व्यापार विकास नीति–2026 पंजाब में औद्योगिक विकास को तेज करने, राज्य की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस दौरान बिजली, उद्योग, वाणिज्य और निवेश प्रोत्साहन मंत्री संजीव अरोड़ा ने घरेलू और वैश्विक निवेशकों को पंजाब में संभावनाओं की तलाश करने और 13–15 मार्च 2026 को मोहाली स्थित प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन–2026’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, “इस सम्मेलन में राज्य अपनी नई औद्योगिक दृष्टि और निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करेगा।”
यह नीति कई महत्वपूर्ण विशेषताएं प्रस्तुत करती है, जिनके माध्यम से यह तय किया जा सकता है कि पंजाब औद्योगिक प्रोत्साहनों की संरचना को किस प्रकार मूल रूप से पुनर्गठित कर रहा है।
* पंजाब की नई औद्योगिक नीति की प्रमुख विशेषताएं
निवेशक-डिज़ाइन किए गए प्रोत्साहन पैकेज
पहली बार निवेशक 20 प्रकार के प्रोत्साहनों में से अपनी पसंद के अनुसार चयन कर सकेंगे और अपने व्यवसाय मॉडल के अनुरूप एक अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर सकेंगे। यह लचीला ढांचा इसलिए तैयार किया गया है क्योंकि फार्मास्यूटिकल, इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों की लागत संरचना अलग-अलग होती है, जिससे प्रोत्साहनों को क्षेत्र, पैमाने और संचालन की जरूरतों के अनुसार ढाला जा सके।
* पंजाब में पहली बार पूंजी सब्सिडी शुरू की गई
पंजाब सरकार ने राज्य के इतिहास में पहली बार पूंजी सब्सिडी शुरू की है। यह प्रभावी ढंग से सरकार को प्रारंभिक निवेश बोझ का हिस्सा साझा करने की अनुमति देता है, निवेशकों के लिए पूंजी जोखिम को कम करता है और उत्पादन शुरू होने से पहले ही प्रोजेक्ट की आंतरिक रिटर्न दर (IRR) में सुधार करता है।
* मौजूदा उद्योग अब प्रोत्साहन के लिए योग्य हैं
नीति पंजाब में पहले से चल रहे उद्योगों के योगदान को मान्यता देती है। आधुनिकीकरण, मशीनरी अपग्रेड, क्षमता विस्तार और मौजूदा निर्माताओं द्वारा शुरू की गई नई उत्पादन लाइनों को अब प्रोत्साहन के लिए योग्य माना जाएगा, और वे नए निवेशकों के समान लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
* प्रोत्साहन सहायता 15 वर्षों तक बढ़ाई गई
नीति के तहत प्रोत्साहन सहायता को 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है, जो कई अन्य राज्यों द्वारा पेश की जाने वाली सामान्य 5 से 10 वर्षों की सहायता अवधि से काफी अधिक है। यह पंजाब को वर्तमान में लाभदायक पूंजी-गहन क्षेत्रों जैसे सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और डेटा सेंटर्स के लिए विशेष रूप से आकर्षक केंद्र बनाता है, जिन्हें रिटर्न उत्पन्न करने में लंबा समय लगता है।
* फिक्स्ड पूंजी निवेश की विस्तृत परिभाषा
नीति फिक्स्ड पूंजी निवेश की परिभाषा का विस्तार करती है, जो आगे प्रोत्साहन के मूल्यांकन का आधार बनती है। भूमि, श्रमिक आवास, अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम में अब निवेश को शामिल किया जाएगा, जिससे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे में निवेश प्रोत्साहन योग्य हो जाता है।
* छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अधिक सहायता
रोजगार सृजन सब्सिडी के लिए योग्यता को 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 श्रमिकों तक घटा दिया गया है। यह बदलाव हजारों छोटी और मध्यम विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन ढांचे में लाता है, खासकर लुधियाना, जालंधर, बटाला और गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक क्लस्टरों में जहां अधिकांश व्यवसाय 30 से 50 कर्मचारियों के साथ काम करते हैं।
* *वित्तीय प्रोत्साहन से संबंधित*
महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और आईटी, आईटीईएस तथा ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स में कर्मचारियों को रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए उच्च रोजगार सृजन सब्सिडी उपलब्ध होगी। प्रोत्साहनों को कार्यबल विविधता से जोड़कर, नीति औद्योगिक विकास के वित्तीय ढांचे में समावेशिता को बढ़ावा देती है।
* *प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन*
9 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सीमावर्ती और किनारे वाले क्षेत्रों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन सहायता मिलेगी। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों में ऐतिहासिक रूप से कम निवेश वाले क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह बढ़ा हुआ प्रोत्साहन मिलेगा।
* प्रोजेक्ट समय-सीमाओं के आधार पर लचीला प्रोत्साहन
निवेशकों को अपनी प्रोत्साहन सहायता अवधि को 15 वर्षों तक बढ़ाने का विकल्प होगा और वे यह फैसला कर सकेंगे कि उनकी प्रोत्साहन विंडो कब शुरू होती है, यह उनके प्रोजेक्ट के समय के आधार पर तय कर सकेंगे। यह प्रोत्साहन को निश्चित नीति समय-सीमाओं के बजाय निवेशों के वास्तविक जीवन चक्र के साथ संरेखित होने की अनुमति देता है।
* समर्पित क्षेत्रीय नीतियां पेश की गईं
आईटी और आईटीईएस, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और निर्माण, सेमीकंडक्टर, फिल्म निर्माण और पर्यटन सहित प्रमुख क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीति ढांचे शुरू किए गए हैं। प्रत्येक क्षेत्र के लिए अब उद्योग विशेषज्ञों और सेक्टर कमेटियों से परामर्श द्वारा विकसित एक समर्पित नीति है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रोत्साहन क्षेत्र-विशेष आवश्यकताओं के अनुसार हों।
नई औद्योगिक नीति ऐसे समय में आई है जब पंजाब निवेश की गति में महत्वपूर्ण वृद्धि देख रहा है। वर्ष 2022 से पंजाब ने 1.55 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए हैं, जिसमें पिछले साल ही 55,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। टाटा, इंफोसिस, वर्धमान, ट्राइडेंट, एचएमईएल और फोर्टिस सहित बड़ी कंपनियों ने पंजाब में निवेश का विस्तार किया है, जो पंजाब सरकार द्वारा बनाए जा रहे औद्योगिक माहौल में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
निवेशक लचीलापन, लंबी अवधि के प्रोत्साहन, मौजूदा उद्योगों के लिए सहायता, समावेशी रोजगार रणनीतियां और लक्षित क्षेत्रीय विकास पर ध्यान केंद्रित करके नई औद्योगिक नीति पंजाब के औद्योगिक विकास, नौकरियों के सृजन और आर्थिक परिवर्तन को मजबूत करने में एक बड़ा कदम साबित होती है।

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पंजाब चुनाव से पहले तख्त हजूर साहिब में पीएम मोदी के जन्मदिन की अरदा, भाजपा के सिख संपर्क को लेकर बहस को हवा दे दी
बठिंडा में रोजाना 222 ट्रैफिक चालान, 43,000 रुपये का जुर्माना
हम पंजाब को लंदन या पेरिस नहीं बनाना चाहते हैं, हम पुराने पंजाब को बहाल करना चाहते हैं: भगवंत मान
मंडी अहमदगढ़ के मुस्लिम युवक गणेश चतुर्थी पर गणेश प्रतिमा घर लाए
पटियाला और मोहाली में ‘फर्जी’ कॉल सेंटरों पर ईडी की छापेमारी जारी
कनाडा में पंजाबी कलाकारों को बढ़ती धमकियों पर गुलाब सिद्धू की गोलीबारी ने सुर्खियां बटोरीं
अमृतसर में ड्रग तस्कर 4 गिरफ्तार 27 किलो हेरोइन, पिस्टल जब्त
पंजाब में आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान सरकार पर कांग्रेस के हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया, 1984 के दंगों का मुद्दा उठाया
एक कमरे के घर से लेकर एशिया कप के गौरव तक, पंजाब की सुखवीर कौर ने संघर्ष को सफलता में बदल दिया
पंजाब कांग्रेस के प्रदर्शन में सचिन पायलट, वारिंग, चन्नी ने हाथ मिलाया
15,000 करोड़ रुपये की गमाडा उधारी योजना से संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट ने महालेखाकार को बुलाया
अमृतसर में सुरक्षा में चूक, 3 इटालियन इमिग्रेशन जांच के बिना बाहर निकले
सचिन पायलट का पंजाब में डेब्यू, कांग्रेस एकता की कोशिशों की शुरुआत
लुधियाना: पीजीआईएमईआर प्रतियोगिता में पीएयू के छात्रों ने शोध को मान्यता में बदल दिया
स्मार्ट सेंसर से लेकर एआई एजेंटों तक, कैसे तकनीक पंजाब में कृषि को नया आकार दे रही है
लंबे समय तक आउटेज को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच पंजाब सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी को बदला
राजा वारिंग से मतभेदों के बीच करण कौर बराड़ ने चंडीगढ़ दौरे से पहले सचिन पायलट से की मुलाकात
अमेरिका में ट्रक चला रहे व्यक्ति को आईसीई ने गिरफ्तार किया है, कुछ दिन पहले डीएचएस ने विवादित पोस्टर वापस लिया
कनाडा ने जबरन वसूली के आरोप में पंजाब के चार लोगों को देश से भेजा अब तक 111 हटाए गए
पंजाब में बीजेपी के नशे विरोधी अभियान से पहले केंद्र में पहुंचे भगवंत मान
लुधियाना में एथलेटिक्स, फुटबॉल, वॉलीबॉल स्पर्धाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागी
कपूरथला के किसान ने धान के खेतों में यूरिया की जगह डेयरी के घोल का इस्तेमाल किया
पंजाब में गन्ने का रकबा 1.16 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा
गैंगस्टर बुरी बसंतकोटिया गुरदासपुर में गिरफ्तार
वायरल मॉन्ट्रियल-न्यूयॉर्क ‘गधा मार्ग’ वीडियो मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी आव्रजन बहस में प्रवेश करता है
फगवाड़ा की नंगल कॉलोनी में हथियारबंद हमलावरों ने घर पर की फायरिंग
पंजाब के मंत्रियों के घरों पर आज से प्रदर्शन करेगा मजदूर मोर्चा
पाकिस्तान सरकार से सिख श्रद्धालुओं को भूमि मार्ग से भारत आने की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया गया
मानसा में बरेटा के पास स्कूल वैन ने पीआरटीसी बस को टक्कर मार दी। छात्र और वैन चालक घायल
सीएलयू की मंजूरी को लेकर ईडी ने ग्रेटर लुधियाना क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रमुख को तलब किया
स्वर्ण मंदिर में लंगर के रूप में देखा भक्तों का समुद्र, गुरुपर्व पर जुलूस
कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने कहा, ‘पंजाब जीतने के बाद हम तय करेंगे कि किसे क्या भूमिका मिलेगी’
नाम बदलाव, वैवाहिक कलह से महिलाओं के चुनाव में प्रवेश में बाधा
अमृतसर में केमिस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, दुकान से मिले हाई स्ट्रेंथ प्रीगाबलिन कैप्सूल
दिलजीत दोसांझ ने ब्रिटेन में रचा इतिहास, नवंबर में अहमदाबाद में परफॉर्म करेंगे
फगवाड़ा के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया, दो रजत पदक जीते
पंजाबी सिंगर गुलाब सिद्धू के बरनाला स्थित घर पर गोलियां चलाईं। ‘गैंगस्टर डोनी बल ने लिया जिम्मेदारी’
सिख इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव पर पंजाब विश्वविद्यालय ने लिया यू-टर्न
पंजाब में किसान मजदूर मोर्चा सोमवार से शुरू करेगा 5 दिन का प्रदर्शन
राशन नहीं, जालंधर की आंगनवाड़ियां बच्चों को परोसी जाती हैं बिस्कुट, टॉफी
चंडीगढ़ ट्राइसिटी में रविवार को भारी बारिश की संभावना
जालंधर की 66 साल पुरानी साहित्यिक यात्रा: 20 किताबें, 160 संकलन और एक विरासत जो उनके पिता की कविता से शुरू हुई
जालंधर के कलाकार ने प्रकृति से प्रेरित मूर्तियों के साथ धूम मचाई