
बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर थाना क्षेत्र में एक कथित योग गुरु और युवती के बीच प्रेम प्रसंग के बाद मामला बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. आरोप है कि योग सीखने के बहाने युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया गया और फिर दोनों के बीच संबंध बने. कुछ समय बाद जब युवती गर्भवती हो गई तो वह डर गई और उसने पूरी बात अपनी मां को बताई. इसके बाद पीड़िता की मां ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कथित योग गुरु चंदन कुमार राय उर्फ चंदन बाबा और उसकी पत्नी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है.
योग सीखने गई थी, प्रेम प्रसंग में फंस गई!
पीड़िता की मां के आरोप के मुताबिक, खदियाही गांव निवासी शिक्षक सह योग गुरु चंदन कुमार राय उर्फ चंदन बाबा योग सिखाने के बहाने उनकी पुत्री के संपर्क में आया था. इसी दौरान दोनों के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम प्रसंग शुरू हो गया.
परिजनों का आरोप है कि युवती को प्रेम संबंध में फंसाने के बाद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए. कुछ समय बाद युवती के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई. गर्भवती होने के बाद युवती डर गई और आखिरकार उसने अपनी मां को पूरी बात बता दी.
बेटी की बात सुनने के बाद मां ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और मामले की शिकायत विभूतिपुर थाने में की. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
FIR के बाद पंचायती ने खड़े किए बड़े सवाल
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद स्थानीय स्तर पर कथित रूप से पंचायती किए जाने की बात सामने आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, इस कथित पंचायती में मामले को निपटाने के लिए आरोपी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना तय किए जाने की चर्चा है.
बताया जा रहा है कि कथित तौर पर तय रकम में से 6.5 लाख रुपये नकद पंचों के पास जमा कराए गए हैं. वहीं, शेष 3.5 लाख रुपये के बदले आरोपी की कार एक पंच के नाम बंधक रखे जाने की बात कही जा रही है.
हालांकि, पंचायती में रकम जमा होने और कार बंधक रखने के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
इज्जत की कीमत 10 लाख? पंचों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कथित पंचायती को लेकर खड़ा हो रहा है. यदि आरोप सही हैं और मामला पहले ही पुलिस के पास पहुंच चुका है, तो फिर गंभीर आपराधिक आरोपों का फैसला गांव की पंचायती में पैसे के लेन-देन से कैसे हो सकता है?
और उससे भी बड़ा सवाल, क्या किसी युवती की कथित अस्मिता और न्याय को 10 लाख रुपये के जुर्माने में तौला जा सकता है? चर्चा यह भी है कि कथित तौर पर तय की गई रकम का इस्तेमाल युवती के गर्भपात और शादी के खर्च में किया जाना था.
पुलिस के सामने मेडिकल जांच और बयान की चुनौती
मामले की अनुसंधानकर्ता सब-इंस्पेक्टर आरती कुमारी के अनुसार, पीड़िता को मेडिकल जांच कराने और अदालत में BNSS की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था. पुलिस के मुताबिक, पीड़िता विभिन्न कारणों से अब तक जांच प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करती रही है. पुलिस का कहना है कि पीड़िता का बयान और मेडिकल जांच इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण हैं. पुलिस इन्हें पूरा कराने का प्रयास कर रही है.
पुलिस बोली- जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
विभूतिपुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा ने बताया कि पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन अनुसंधान किया जा रहा है. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस आरोपों की जांच कर रही है. आरोपी और उसकी पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक सवाल सबसे बड़ा है, जब मामला पुलिस की जांच के दायरे में है, तब कथित पंचायती में लाखों रुपये के लेन-देन की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह न्याय की कोशिश थी या गंभीर आरोपों को सामाजिक समझौते में दबाने की कवायद? इन सवालों का जवाब अब पुलिस की जांच और कथित पंचायती में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल से ही सामने आएगा.



