
तीस हजारी कोर्ट ने पिछले महीने ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट की यात्रा के दौरान चलती स्लीपर बस के अंदर 17 वर्षीय एक लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार से संबंधित मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र का संज्ञान लिया है।
पुलिस ने 18 सितंबर को अदालत के समक्ष 398 पन्नों का आरोपपत्र दायर किया, जिसमें बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को आरोपी बनाया गया। अदालत ने 24 सितंबर को आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था। पुलिस ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य को गवाह बनाया है।
चार्जशीट के अनुसार, बस से कथित तौर पर बरामद वीर्य और बालों के नमूनों सहित जैविक नमूने और मोबाइल फोन लोकेशन डेटा जांच में प्रमुख सबूत के रूप में सामने आए हैं।
लड़की ने अदालत के समक्ष अपने बयान में जांचकर्ताओं को बताया कि उसने बस में सवार लोगों से नोएडा के सेक्टर 63 की यात्रा के बारे में पूछा था और उसे बताया गया कि बस उसी दिशा में जा रही है। वह बस में सवार हुई, लेकिन पाया कि अंदर कोई अन्य यात्री नहीं था। जब उसने उतरने की कोशिश की तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे वापस बस में खींच लिया।
पुलिस के अनुसार, ग्रेटर नोएडा और कश्मीरी गेट के बीच लगभग 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कथित हमला हुआ। कथित घटना के बाद आरोपी ने लड़की को कश्मीरी गेट बस स्टैंड के बाहर छोड़ दिया और बस में सवार होकर भाग गया। बाद में लड़की कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंची और मामले की सूचना दी।
पुलिस ने कहा कि उन्होंने तुरंत उसकी मेडिकल जांच की व्यवस्था की और मामला दर्ज किया। इसके बाद कई टीमों ने बस की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच की। बस का पता लगाया गया और चार घंटे के भीतर तिमारपुर इलाके से बरामद किया गया, जिसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपियों की पहचान कानपुर निवासी चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप के रूप में हुई है।
आरोपियों का पुलिस सत्यापन नहीं
जांच में बस को किराए पर लेने और चलाने में कथित खामियां भी पाई गईं। पुलिस के अनुसार, बस मालिक ने पुलिस सत्यापन किए बिना दोनों आरोपियों को नौकरी पर रखा था।
बस के अंदर लगा सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था, जबकि उसकी खिड़कियों पर पर्दे लगाए हुए थे। किसी भी सुरक्षा या नियामक जांच के लिए यात्रा के दौरान बस को भी नहीं रोका गया था। पुलिस ने आगे पाया कि बस के खिलाफ 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे।



