राज्यबिहार

सासाराम में तिरंगे में लौटा BSF का लाल, ड्यूटी के दौरान थमी सांस; अंतिम दर्शन को उमड़ा गांव

शिवसागर प्रखंड के घटीकन गांव के बीएसएफ जवान राजनाथ पासवान की गुरुवार को ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से मौत हो गई। असम के गोलाघेरा, सिलचर में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात राजनाथ का शव शुक्रवार सुबह तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा।

बीएसएफ के अधिकारी राष्ट्रीय ध्वज के साथ उनका पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे। शव के गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया और अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

फरवरी में होना था रिटायरमेंट, उससे पहले छूटा साथ

राजनाथ पासवान की फरवरी 2027 में सेवानिवृत्ति होने वाली थी। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही वे ड्यूटी की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर अपनों के बीच अधिक समय बिताएंगे, लेकिन इससे पहले ही उनका निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने की खबर से परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर है।

मिलनसार राजनाथ की याद में नम हुईं ग्रामीणों की आंखें

ग्रामीणों ने बताया कि राजनाथ पासवान काफी मिलनसार स्वभाव के थे। गांव के लोगों से उनका आत्मीय जुड़ाव था। उनके निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हर कोई उनके व्यवहार और गांव से उनके जुड़ाव को याद कर रहा है।

तिरंगे में लौटा जवान, गांव में होगा अंतिम संस्कार

बीएसएफ अधिकारियों की मौजूदगी में राजनाथ का शव राष्ट्रीय ध्वज के साथ गांव लाया गया। उनका अंतिम संस्कार गांव में ही राष्ट्रीय सम्मान के साथ किया जाएगा। जवान के सम्मान में अंतिम विदाई की तैयारियां की जा रही हैं।

तीन बेटियों और एक बेटे के सिर से उठा पिता का साया

राजनाथ पासवान के परिवार में तीन पुत्रियां और एक पुत्र हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ओर देश की सेवा में जीवन बिताने वाले जवान को अंतिम विदाई देने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर परिवार के लिए पिता के जाने का दुख असहनीय है।

गांव में पसरा मातम, हर आंख में दिखा दर्द

राजनाथ के निधन से घटीकन गांव में शोक का माहौल है। जिस जवान के स्वागत की उम्मीद गांव को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद थी, आज उसी गांव में उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है। राष्ट्रीय सम्मान के साथ होने वाला उनका अंतिम संस्कार ग्रामीणों के लिए भावुक क्षण होगा।

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