कहीं आप तो प्री-डायबिटीज स्टेज पर नहीं हैं? एक्सपर्ट बताते हैं वे 6 संकेत जो आपको नहीं भूलना चाहिए

प्री-डायबिटीज वह है जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सामान्य से अधिक होती है, लेकिन अभी डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचती है। टाइप 2 डायबिटीज को रोका या टाला जा सकता है अगर इस स्थिति को समय रहते गंभीरता से लिया जाए।
भारत सहित पूरे विश्व में डायबिटीज, एक गंभीर बीमारी जो जीवनशैली में तेजी से बढ़ती है, एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या बन गई है। लेकिन प्रारंभिक चरण, जिसे हम “प्री-डायबिटीज” कहते हैं, इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यह वह स्थिति होती है जब आपके रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन अभी डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचा होता। टाइप 2 डायबिटीज को रोका या टाला जा सकता है अगर इस स्थिति को समय रहते गंभीरता से लिया जाए। दुर्भाग्यवश, अधिकतर लोग इस स्टेज को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि इसके लक्षण बहुत सूक्ष्म होते हैं। दिल्ली में स्थित अंजना कालिया डाइट क्लिनिक में आयुर्वेदिक और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अंजना कालिया बताते हैं प्री-डायबिटीज के छह लक्षणों को नहीं भूलना चाहिए।
इन संकेतों को न करें नज़रअंदाज़:
बार-बार भूख लगना: भूख बढ़ जाती है जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो कोशिकाओं को ऊर्जा नहीं मिलती। यह लगातार भूख लगने का लक्षण हो सकता है कि आपका ब्लड शुगर असंतुलित है।
अत्यधिक प्यास लगना: आप सामान्य से अधिक प्यास महसूस करते हैं और दिन भर पानी पीते रहते हैं, तो आपके शरीर में अधिक शुगर हो सकता है। यह शरीर को पानी से भरने की कोशिश करता है।
बार-बार पेशाब आना: बार-बार पेशाब होने का कारण ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक होती है, जिससे किडनी अधिक श्रम करती है। यह पहला संकेत हो सकता है।
थकान होना: पूर्व-डायबिटीज में व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है क्योंकि उनके शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा में नहीं बदल पातीं।
वज़न का अचानक बढ़ना या घटना: प्री-डायबिटीज का संकेत बिना किसी कारण के अचानक वजन घटना या बढ़ना हो सकता है, खासकर पेट के आसपास फैट जमना।
त्वचा में बदलाव: इस स्थिति का संकेत भी गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों में त्वचा का काला पड़ना या मोटा होना हो सकता है।
यदि आप इन लक्षणों में से किसी एक का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच करवाएं और डॉक्टर से परामर्श लें। डायबिटीज के खतरे को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर निदान से काफी हद तक टाल सकते हैं। याद रखें, सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।



